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“हिरासत कांड पर बिफरा हाई कोर्ट: दिल्ली पुलिस को कड़ी चेतावनी- सच्चाई नहीं आई सामने तो CBI संभालेगी जांच”

दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है. अदालत ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है.

Delhi high court
Edited by Shubhra Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की हिरासत मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि संतोषजनक जांच नहीं होने पर मामला CBI को सौंपा जा सकता है. कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज में गड़बड़ी पर भी सवाल उठाए हैं. अगली सुनवाई 19 मई को होगी.

मामला सीबीआई को सौप सकता है

छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को सीबीआई को सौप सकता है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही हैं. कोर्ट 19 मई को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट में पेश किया, लेकिन कोर्ट रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ. कोर्ट ने कहा कि पुलिस का अब तक का रवैया भरोसेमंद लायक नहीं है, जबकि आरोप बेहद गंभीर है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि आप कार्रवाई नहीं करेंगे तो मामले को सीबीआई को सौप देंगे. कोर्ट सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल उठाया है.

कोर्ट ने नाराजगी जताई

पहले कोर्ट ने जिन जगहों के सीसीटीवी सुरक्षित रखने को कहा था, उनमें से दो जगहों के कैमरे काम नहीं कर रहे थे. इसपर कोर्ट ने नाराजगी जताई है. जबकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ये सीसीटीवी फुटेज काफी अहम है. पिछली सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि छात्रों द्वारा हिरासत और अवैध रूप से रोके जाने के आरोप पूरी तरह से मनगढंत और प्रेरित है.

पुलिस ने कहा था कि इन आरोपों का मुख्य उद्देश्य माओवादी गतिविधियों से जुड़ी एक संवेदनशील जांच में बांधा पहुचाना है. पुलिस ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि यह पूछताछ एक लापता महिला और कथित माओवादी या नक्सली विचारधारा से जुड़े मामले का एक हिस्सा है. दिल्ली पुलिस ने यह हलफनामा गिरफ्तार छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर दायर किया है.

10 लोगों को हिरासत में लिया था

पुलिस द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों को केवल जुलाई 2025 में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 10 लोगों को हिरासत में लिया था. याचिकाओं में से एक सागरिका राजोरा ने यह याचिका दायर की है, जिसमें अदालत से उनकी बहन लक्षिता राजोरा को तुरंत अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है.

कई लोगों का शाम से अता पता नहीं

22 वर्षीय लक्षिता 13 मार्च की शाम से लापता हैं. याचिका में कहा गया है कि वो विजय नगर इलाके में एक छात्र संगठन के दफ्तर गई. 13 मार्च के शाम 8 बजे के बाद से लक्षिता राजोरा का मोबाइल फोन बंद है. दायर याचिका में कहा गया है कि लक्षिता राजोरा छात्र संगठन के जिस दफ्तर में गई थी, उस दफ्तर में मौजूद कई लोगों का शाम 8 बजे से कोई अता पता नहीं है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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