दिल्ली हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार राऊज एवेन्यु कोर्ट के अहलमद की ओर से दायर अग्रिम जमानत पर 9 जून को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि हम हर किसी पर शक नहीं कर सकते है.
आप सीबीआई को फिर केस ट्रांसफर करने की मांग कर रहे है. जबकि एसीबी जांच कर रही है. कोर्ट ने कहा कि एक ऑथोरिटी से दूसरे ऑथोरिटी को केस ट्रांसफर करना आसान बात नही है. इसमें स्पष्ट रूप से दुर्भावना होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आपकी आशंका को.देखते हुए उन्हें पहले ही आगाह कर दिया था और उन्होंने सही तरीके से समिति का पुनर्गठन किया है. वर्ना हम वही करते जो आप चाहते है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर ने कहा कि मुद्दा यह है कि आवेदक की प्रारंभिक शिकायत एसीपी और जॉइंट पुलिस कमिश्नर के खिलाफ थी. इस दौरान विभाग के अध्यक्ष एक ही रहें. माथुर ने यह भी कहा कि तीन तारीख को दर्ज किए गए बयानों पर दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में भरोसा किया जा रहा है. वही एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल संजय भंडारी ने कहा कि अतिरिक्त स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है.
हालांकि कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट अदालत के रिकॉर्ड पर अभी नहीं है. कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है. जिसके बाद अहलमद की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल किया गया है. जिन्हें रिकॉर्ड पर ले लिया गया है. वही वरिष्ठ वकील तनवीर अहमद मीर ने स्टेट्स रिपोर्ट को पढ़ते हुए कहा कि जांच अधिकारी को इस आरोप के बारे में लिखने की हिम्मत कैसे हुई. कोर्ट ने कहा कि हमने उन्हें.सावधान कर दिया है, बाद में.इसका परीक्षण किया जाएगा.
मीर ने तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुकेश कुमार पर लगे आरोप काफी संगीन है. मुकेश कुमार एफआईआर में मुख्य आरोपी है. मामले की सुनवाई मुकेश कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मोहित माथुर और मनिंदर सिंह ने कहा था कि फरवरी से लेकर अब तक मैं कई बार जांच के शामिल हो चुका हूं. माथुर ने कहा था कि कई शिकायतें मिली है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मैंने जनवरी में शिकायत की थी, उस अधिकारी को जांच अधिकारी बना दिया गया है. मैं किस निष्पक्षता की उम्मीद कर सकता हूं. इससे पहले मुकेश कुमार की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए राऊज एवेन्यु कोर्ट ने कहा था कि उस पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और जांच एजेंसी को उनसे पूछताछ के लिए हिरासत की आवश्यकता है ताकि पूरे षड्यंत्र की गहराई से पड़ताल की जा सके. कोर्ट ने यह भी कहा था कि सह-आरोपितों व साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधान और बीएनएस की धारा 308 के तहत दर्ज किया गया है.
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