दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडर महिलाओं और बच्चों को बीएनएस कानून के तहत पीड़ित के रूप में शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. दायर जनहित याचिका में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के तर्ज पर शामिल करने की मांग, ट्रांसजेंडर के खिलाफ हिंसा पर एससी/एसटी एक्ट के तर्ज पर कानून बनाने की मांग, जबतक कानून में संशोधन न हो, तब तक अदालत की तरफ से अस्थायी सुरक्षा प्रावधान और विभिन्न मंत्रालयों से जवाब और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की गई है. यह जनहित याचिका डॉक्टर चंद्रेश जैन की ओर से दायर की गई है.
कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ वकील एन हरिहरन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि देश के मौजूदा आपराधिक कानून ट्रांसजेंडर समुदाय को यौन अपराधों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं प्रदान करता है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के बावजूद ट्रांसजेंडर को कानूनी संरक्षण से बाहर रखा गया है.
वर्कप्लेस हैरेसमेंट में ट्रांसजेंडर असुरक्षित
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद ट्रांसजेंडर लोग आज भी रेप, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा, वर्कप्लेस हैरेसमेंट जैसे मामलों में भारतीय कानूनों में पीड़ित की परिभाषा में शामिल नही किया गया है. उन्होंने यह भी कहा है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन आज भी ट्रांसजेंडर लोगों को सुरक्षा, गरिमा और न्याय से वंचित रखा गया है. जनहित याचिका में कहा गया है कि देशभर में कई चौकाने वाली घटना देखने को मिली है.
दो ट्रांसजेंडर छात्रों के साथ गैंगरेप की घटना
2017 में एक ट्रांसजेंडर महिला का आर्मी के जवानों ने यौन शोषण किया, लेकिन काफी दबाव के बाद एफआईआर दर्ज किया गया, मणिपुर में दो ट्रांसजेंडर छात्रों के साथ गैंगरेप हुआ, दिल्ली में रेलवे पुलिस द्वारा ट्रांसजेंडर महिलाओं की जबरन जेंडर जांच और अपमानजनक जांच की गई. इतना ही नही याचिकाकर्ता के मुताबिक पुलिस कस्टडी और जेल में कई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ रेप और यातना की घटना देखने को मिल चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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