दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने दिल्ली दंगे से सबंधित मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को राहत मिल गई है. सत्र न्यायालय ने कपिल मिश्रा की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया है. राऊज एवेन्यु कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आदेश को रद्द कर दिया है.
आरोपियों को दी गई चार्जशीट की कॉपी
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी पेन ड्राइव में दे दी गई है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस से मामले से संबंधित चार्जशीट की कॉपी की प्रति सभी आरोपियों को देने को कहा था. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) वैभव चौरसिया ने 1 अप्रैल को कहा था कि प्रथम दृष्टया यह एक संज्ञेय अपराध है जिसकी जांच की जानी चाहिए.
यह स्पष्ट है कि मिश्रा कथित अपराध के समय इलाके में ही थे. इसलिए आगे की जांच की आवश्यकता है. उसने यह निर्देश यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास की शिकायत पर दिया था, जिसमें मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि मिश्रा की दंगे में कोई भूमिका नहीं थी.
क्या है आरोप?
वहीं दूसरी ओर मिश्रा ने एसीजेएम के समक्ष आरोप तय होने पर बहस के दौरान कहा था कि उन्होंने एक्स हैंडल पर किए गए पोस्ट के जरिए केवल प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों को निशाना बना रहे थे, किसी समुदाय को नहीं. उनपर दंगे के दौरान समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने को लेकर पोस्ट करने का आरोप है. उनके वकील ने यह यह दलील मंगलवार को एसीजेएम की अदालत में दी थी.
निर्वाचन अधिकारी की शिकायत के आधार पर मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. अदालत ने इससे पहले जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के सिलसिले में विभिन्न वगरे के बीच दुश्मनी को बढावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लिया था.
ये भी पढें: पश्चिम बंगाल एसआईआर के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 11 नवंबर को करेगा सुनवाई
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
