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UGC इक्विटी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन पड़ा भारी, राहुल-अखिलेश समेत 11 नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट

जंतर-मंतर पर यूजीसी के नए इक्विटी दिशानिर्देशों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 11 नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन बिना अनुमति आयोजित किया गया था और सरकारी आदेश की अवज्ञा की गई..

Edited by Rohit Agrawal

फरवरी 2025 में यूजीसी के नए इक्विटी दिशानिर्देशों के खिलाफ जंतर-मंतर पर डीएमके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के मामले में दिल्ली पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है. पुलिस ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, कनिमोझी, ए. राजा सहित कुल 11 नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(क) (सरकारी आदेश की अवज्ञा) और धारा 3(5) (सामान्य इरादे से किया गया आपराधिक कृत्य) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

प्रदर्शन बिना अनुमति के आयोजित होने का आरोप

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि विरोध प्रदर्शन बिना किसी अनुमति के आयोजित किया गया था. चार्जशीट में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से बार-बार अनुरोध किया गया था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और निर्धारित स्थान पर रहे, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया. पुलिस ने आगे की जांच के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित की है.

कोर्ट ने पुलिस से उठाए थे सवाल

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने एसएचओ और एसीपी से पूछा था कि उन्होंने किस आधार पर यह चार्जशीट दाखिल की और कैसे निर्धारित किया कि आरोपियों के खिलाफ मामला बनता है. कोर्ट ने यह भी पूछा था कि जांच में शामिल होने का नोटिस क्यों केवल कुछ आरोपियों को भेजा गया, जबकि अन्य 10 आरोपियों को ऐसा नोटिस जारी नहीं किया गया. पुलिस ने जवाब दिया कि जांच अभी शुरुआती स्टेज में है और सबूतों की रिकवरी तथा को-आरोपियों की गिरफ्तारी जरूरी है.

यूजीसी नियमों पर क्या था विवाद?

यूजीसी के नए इक्विटी नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को 24×7 हेल्पलाइन शुरू करनी होगी. इसके साथ ही Equal Opportunity Center की स्थापना, इक्विटी कमिटी और इक्विटी स्क्वाड का गठन करना अनिवार्य है. नियमों का पालन न करने पर संस्थानों की मान्यता रद्द करने या फंड रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

इसको लेकर यूजीसी की दलील है कि 2020 से 2025 के बीच जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100% से अधिक वृद्धि हुई है. रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद ऐसी निगरानी व्यवस्था जरूरी हो गई थी. इस नियम के खिलाफ दर्जनों याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जिसमें मांग है कि नियम को असंवैधानिक घोषित किया जाए. तमिलनाडु विधानसभा ने भी 9 जनवरी को प्रस्ताव पारित कर इन नियमों को वापस लेने का आग्रह किया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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