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वक्फ अधिनियम की वैधता मामला; सुप्रीम कोर्ट दिसंबर के दूसरे सप्ताह में करेगा अंतिम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिसंबर के दूसरे सप्ताह में अंतिम सुनवाई करेगा. ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने याचिकाएं दायर की हैं.

Supreme Court

वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट दिसंबर के दूसरे सप्ताह में अंतिम सुनवाई करेगा. न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ इन मामलों की सुनवाई कर रही है.

याचिकाकर्ता और हस्तक्षेपकर्ता पक्ष

यह याचिकाएं कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य पक्षों द्वारा दायर की गई हैं. दूसरी ओर, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और असम जैसे छह भाजपा शासित राज्यों ने इस संशोधन के समर्थन में हस्तक्षेप (Intervention) की अर्जी दाखिल की है.

पिछली सुनवाई और कोर्ट की टिप्पणियां

पिछली सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील से अदालत ने सवाल किया था कि अब 1995 के अधिनियम को भी चुनौती दी जा रही है, जबकि इसे चुनौती देने में देरी हुई है. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी पूजा स्थलों से संबंधित कानून और अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की वैधता से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर चुका है.

याचिका में की गई मुख्य मांगें और आपत्तियां

याचिकाकर्ताओं ने वक्फ अधिनियम की धारा 3(R), 4, 5, 6(1), 7(1), 8, 28, 29, 33, 36, 41, 52, 83, 85, 89 और 101 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है. उनका तर्क है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 27 और 300A के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.

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वक्फ अधिनियम की धारा 4 और 5 के दायरे से हिंदुओं और अन्य गैर-मुस्लिमों को बाहर रखने तथा धारा 6(1) व 7(1) के तहत पीड़ित किसी भी व्यक्ति को बाहर किए जाने पर आपत्ति जताई गई है. वक्फ से जुड़े विवादों में हिंदुओं और गैर-मुस्लिमों को सिविल अदालतों में जाने की अनुमति देने तथा गैर-मुस्लिमों को वक्फ अधिनियम की धारा 83 और 85 के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है.

वक्फ ट्रिब्यूनल बनाम सिविल कोर्ट

याचिका में यह भी मांग की गई है कि वक्फ बोर्ड और गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के बजाय स्वतंत्र सिविल कोर्ट द्वारा किया जाना चाहिए.



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