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2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित यूएपीए मामले में आरोपी इशरत जहां को मिली जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में आरोपी इशरत जहां को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इशरत जहां को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी.

Delhi high court case
Edited by Shubhra Rai

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि इशरत जहां को जमानत मिले चार साल से अधिक समय हो चुका है और इस दौरान उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है. दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या का आरोप लगाया था. पुलिस का कहना था कि इशरत जहां अन्य आरोपियों के साथ मिलकर दंगों की साजिश में शामिल थीं.

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

आरोपी इशरत को बड़ी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट से 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित यूएपीए मामले में आरोपी इशरत जहां को बड़ी राहत मिली है. हाई कोर्ट दिल्ली पुलिस की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें इशरत जहां को मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने दिल्ली पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जमानत दिए हुए चार साल से अधिक समय बीत चुका है और ऐसा कोई आरोप नहीं है कि इशरत जहां ने किसी भी तरह की शर्तों का उल्लंघन किया हो. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया की वह जमानत देने वाले विवादित आदेश में दखल देने के लिए तैयार नहीं है.

अदालत ने SC के फैसले की सही व्याख्या नहीं की

कोर्ट ने कहा हम यह साफ करते है कि हमने केस के मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है. मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस का कहना था कि ट्रायल कोर्ट का आदेश स्थापित कानून के विपरीत है. इसमें ऐसी खामियां हैं, जो मामले की जड़ तक जाती है. पुलिस ने यह भी दलील दी कि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले की सही व्याख्या नहीं की. साथ ही यह आरोप लगाया गया कि इशरत जहां अन्य आरोपियों के साथ निकट रूप से जुड़ी हुई थी.

आदेश को रद्द करने की मांग की

उन्होंने प्रदर्शन आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके कारण दंगे और संपत्ति को नुकसान हुआ. दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख कर 14 मार्च 2022 को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत इशरत जहां को जमानत मिली थी. पुलिस की दलील है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला अनुचित था और इसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम नहीं किया गया.

मामला सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है

इस मामले में शरजील ईमाम, उमर खालिद, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा, ताहिर हुसैन, इशरत जहां, आसिफ इकबाल तन्हा, सैफुरा जरगर, फैजान खान, नताशा नारवाल और अन्य नाम शामिल है. यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे. दंगों में मारे गए लोगों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू थे.

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-भारत एक्सप्रेस 



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