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उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिलेगी राहत? दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में दाखिल किया तीखा जवाब

2020 दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में विरोध करते हुए दोनों को ‘मास्टरमाइंड’ बताया है. मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होगी.

Delhi Riots 2020 Police Opposes Umar Khalid Sharjeel Imam Bail In High Cour
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली 2020 दंगा मामले में यूएपीए के तहत आरोपी उमर खालिद और शरजील ईमाम की ओर से दायर जमानत याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा. दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद अपना जवाब दाखिल कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने दोनों की जमानत का विरोध किया है.

दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली दंगा 2020 का दोनों मास्टरमाइंड है. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि जमानत याचिकाएं गलतफहमी पर आधारित और कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं है.पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से जनवरी 2026 में जमानत से इनकार किए जाने का जिक्र करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी भूमिका को कमांड ऑथोरिटी वाला बताते हुए कहा था कि उनकी संलिप्तता दूसरे सह-आरोपियों अलग थी.

3 बार जमानत हुई खारिज

उमर खालिद और शरजील इमाम ने कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इससे पहले उमर खालिद की तीन बार जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है. 4 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से दायर जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था.

कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामलों में जमानत के सवाल को एक बड़ी बेंच के पास भेजा है. दिल्ली पुलिस ने खालिद की ओर से दायर जमानत का विरोध किया था. उमर खालिद और शरजील इमाम ने सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम एनआईए मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जमानत याचिका दायर की थी.

जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं

दायर जमानत याचिका में उस व्याख्या पर सवाल उठाया गया था, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को लेकर भी दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य का परित्याग नहीं है. उचित प्रयोग के लिए न्यायालय को एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होते हैं? क्या आरोपी की भूमिका का अपराध घटित करने से कोई उचित संबंध है?

गुणात्मक रूप से भिन्न

कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट ने जमानत की मांग को ठुकराया है. कोर्ट ने कहा था इस प्रक्रिया से साजिश के अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता है. कोर्ट ने कहा था उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से भिन्न स्थिति में हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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