Urdu Conclave 2026

भारत-जर्मनी के न्यायपालिका प्रमुखों की अहम बैठक, एआई और मध्यस्थता पर सहयोग बढ़ाने पर जोर

सीजेआई सूर्यकांत ने जर्मनी के कार्ल्सरूहे स्थित फेडरेशन कोर्ट ऑफ जस्टिस के प्रिसाइडिंग जज डॉ. उलरिच हेरमैन और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की.

सीजेआई सूर्यकांत ने जर्मनी के कार्ल्सरूहे स्थित फेडरेशन कोर्ट ऑफ जस्टिस के प्रिसाइडिंग जज डॉ. उलरिच हेरमैन और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की. 26 अगस्त 2026 को हुई इस बैठक में दोनों देशों की न्यायिक व्यवस्था, अदालतों में तकनीक और एआई के इस्तेमाल, सीमा पार मध्यस्थता और आपसी न्यायिक सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.

बैठक के दौरान भारत और जर्मनी की अलग-अलग न्यायिक प्रणालियों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि दोनों देशों के अनुभव एक-दूसरे के लिए काफी उपयोगी है. खासतौर पर लंबित मामलों, न्यायिक कार्यभार, मामलों के तेजी से निपटारे और आम लोगों तक न्याय की पहुंच जैसे मुद्दों पर अनुभव साझा करने पर जोर दिया गया.

सीजेआई सूर्यकांत ने जर्मनी में बढ़ते आपराधिक अपीलीय मामलों को देखते हुए नए क्रिमिनल सीनेट के गठन का भी स्वागत किया. बैठक में भारत की एकीकृत न्यायिक व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की भूमिका पर भी विस्तार से विचार विमर्श हुआ. इस बैठक में भारत की ओर से बताया गया कि ई-कोर्ट्स मिशन के तीसरे चरण पर काम चल रहा है. इसके तहत डिजिटल कोर्ट व्यवस्था, ई-फाइलिंग, इलेक्ट्रॉनिक समन, केस से जुड़ी डिजिटल सुविधाओं और अन्य तकनीकी सेवाओ को मजबूत किया जा रहा है.

ऑनलाइन और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की व्यवस्था

एआई के इस्तेमाल को लेकर साफ किया गया है तकनीक का उद्देश्य न्यायाधीशों की मदद करना है, उनकी जगह लेना नहीं. एआई का उपयोग कानूनी रिसर्च, अनुवाद और प्रशासनिक कामों में किया जा सकता है, लेकिन न्यायिक फैसले और विवेक का अधिकार न्यायाधीशों के पास होगा. इस बैठक में सीमा पार विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई. भारत में मेडिएशन एक्ट 2023 के जरिये मध्यस्थता को कानूनी आधार दिया गया है और ऑनलाइन व अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भी व्यवस्था की गई है.

दोनों देशों के बीच व्यावसायिक विवादों के समाधान और सीमा पार मध्यस्थता के क्षेत्र में अनुभव साझा करने की संभावना पर जोर दिया गया. भारत-जर्मनी की न्यायिक संस्थाओं के बीच एक संरचित सहयोग व्यवस्था या.समझौता ज्ञापन बनाने पर भी चर्चा हुई. इसके तहत जजों के अध्ययन दौरे, कार्यशालाएं, कोर्ट की कार्यवाही का अवलोकन, ई-फाइलिंग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल रिकॉर्ड और न्यायिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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