दिल्ली 2020 दंगा मामले में कथित आरोपी शरजील इमाम ने जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. कोर्ट शरजील इमाम की ओर से दायर जमानत याचिका पर 17 जुलाई को सुनवाई करेगा. इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था. दायर जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस ने विरोध किया था.
स्पष्टीकरण मिलने तक लागू रहेंगे निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से पेश वकील तालिब मुस्तफा ने कहा था कि एक साल तक जमानत अर्जी न लगाने जैसी रोक लगाई जा सकती है? इसपर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को भी विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा था कि इस मामले में कुछ अन्य आरोपियों को मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने का फायदा मिला है.
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा था कि जब तक बड़ी बेंच से कोई स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष, निर्देश या रोक लागू रहेंगे. उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें कोई शिकायत या समस्या थी, तो वे सुप्रीम कोर्ट जाकर स्पष्टीकरण मांग सकते थे. इसके लिए सही जगह सुप्रीम कोर्ट ही थी. एक बार जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया, तो यह अदालत नहीं कर सकती.
कोर्ट के फैसले के बाद दायर की जमानत याचिका
उमर खालिद और शरजील इमाम ने सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम एनआईए मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जमानत याचिका दायर की थी. दायर जमानत याचिका में उस व्याख्या पर सवाल उठाया गया था, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को लेकर भी दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. दायर नई जमानत याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 6 महीने बाद भी ट्रायल में कोई प्रगति नही हुई है और वह पिछले 6 साल से जेल में बंद है.
इससे पहले ताहिर हुसैन, सलीम मलिक सहित अन्य को जमानत देने से कड़कड़डूमा कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था. तीनों आरोपियों ने इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट से 5 आरोपियों की मिली जमानत के आधार पर जमानत की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को खारिज कर दिया था. तीनों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए है.
क्या थे आरोप?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को छोड़कर गुलफिशा फातिमा सहित पांच आरोपियों को जमनात दे दिया था. उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है.
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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