दिल्ली में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए गठित वैधानिक संस्था दिल्ली महिला आयोग के लंबे समय से बंद होने के मामले में दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने चिंता व्यक्त की है. कोर्ट 25 फरवरी को याचिका पर अगली सुनवाई करेगा. यह जनहित याचिका आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की है.
दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि दिल्ली महिला आयोग लंबे समय से बंद पड़ा है. यहां तक कि कोई प्रशासनिक काम तक नही हो रहा है. वहां पर न तो कोई हेल्पडेस्क काम कर रहा है, न ही अधिकारी या कर्मचारी मौजूद रहते है. जिसके चलते पीड़ित महिलाओं की शिकायत दर्ज नही हो पा रही हैं.
महिलाओं को न्याय और सुरक्षा से वंचित कर रहा आयोग
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2024 से दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष के पद पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके कारण संस्था में कोई काम नही कर रहा है और ना ही इसका कोई नेतृत्व कर रहा है. इसका असर परिवार परामर्श इकाइयां, रेप क्राइसिस सेल, संकट हस्तक्षेप सेवाएं और शिकायत निवारण तंत्र पूरी तरह ठप पड़ा है.
याचिकाकर्ता के अनुसार यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15 (3) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है. क्योंकि इससे महिलाओं को न्याय, संरक्षण और संस्थागत सहायता से वंचित किया जा रहा है. खासकर ऐसे समय में जब दिल्ली देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है.
याचिका में आयोग को शुरू करने की मांग
दायर याचिका में दिल्ली महिला आयोग को तुरंत शुरू करने की मांग की गई है. याचिका में अध्यक्ष की नियुक्ति सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति और संसाधन सुनिश्चित करने की मांग की गई है. दिल्ली महिला आयोग की आखिरी नियुक्ति अध्यक्ष स्वाति मालीवाल थीं. जिन्होंने जनवरी 2024 को राज्यसभा जाने के लिए पड़ छोड़ा है.
हालांकि दिल्ली महिला आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी भी उनके कार्यालय का पता यही है और अध्यक्ष समेत इसके मेंबर सेक्रेटरी और अन्य पद खाली दिखाए गए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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