पीली मटर के आयात पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या घरेलू दाल का उत्पादन पर्याप्त है, क्योंकि किसानों से दाल भंडारण के लिए जाती है और इन भंडारणों का स्वामित्व किसानों के पास नही होता और इस प्रकार कीमतों में उतार चढ़ाव होता है.
किसानों को पहुचा रहा नुकसान
यह याचिका किसान महा पंचायत की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि पीली मटर को दालों का विकल्प माना जाता है और इसका आयात भारत के किसानों की आजीविका को नुकसान पहुचा रहा है. खास कर उन किसानों को.इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है जो दालें उगाते है.
पीली मटर से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे है, लेकिन इसका अंतिम परिणाम यह नहीं होना चाहिए कि अंतिम उपभोक्ता को परेशानी हो. अदालत ने कहा कि आप आयात की अनुमति नहीं देते और फिर कमी हो जाती है. हमें इससे बचना होगा. आपने बताया कि कुछ विदेशों में पीली मटर का इस्तेमाल मवेशियों के चारे के रूप में करते है. इसका स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? इसपर याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पीली मटर खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और यह एक बड़ी समस्या है.
नीति आयोग ने दी रिपोर्ट
उन्होंने कहा बड़ी संख्या में किसानों की जान जा रही है और वह आत्महत्या कर रहें हैं. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि 35 रुपए प्रति किलोग्राम की सस्ती कीमत पर पीली मटर का आयात अरहर, मूंग और उड़द जैसे दालों को प्रभावित कर रहा है. सरकार और कई विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीली मटर का आयात न किया जाए.
भूषण ने कहा कि कृषि मंत्रालय और नीति आयोग ने भी पीली मटर के आयात के खिलाफ अपनी रिपोर्ट दी है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

