दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अवमानना नोटिस के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है. DMRC ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाएं पूरी तरह से बंद नहीं की गई थीं, बल्कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आंशिक व अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए थे.
DMRC द्वारा हलफनामे में दी गई मुख्य बातें
DMRC के नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशनों पर एन्ट्री और एग्जिट गेट सीमित किए गए थे, जबकि 258 स्टेशन पूरी तरह खुले रहे और सामान्य रूप से संचालित होते रहे.
ट्रेनों के फेरे और यात्रा आंकड़े
उस दिन कुल 271 ट्रेनें चलाई गईं और 4,157 ट्रिप्स पूरी की गईं. DMRC ने कहा कि ट्रेन सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई थी. इसके अलावा, 14 स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा भी उपलब्ध रही. जिन 45 स्टेशनों पर पाबंदियां लगाई गई थीं, उन्हें रात 10 बजे हटाकर सभी स्टेशन फिर से खोल दिए गए. इसके बाद 12 अक्टूबर को केवल 6 स्टेशनों पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गईं.
10 अक्टूबर को लगभग 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो से यात्रा की, जबकि आमतौर पर दूसरे शनिवार को यह संख्या करीब 58 लाख होती है. DMRC ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण यात्रियों की संख्या कम हुई और लोगों की दिनचर्या में बाधा आई.
यात्रियों को सूचना और प्रबंधन
प्रतिबंधों की जानकारी यात्रियों तक समय पर पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया, आधिकारिक वेबसाइट, DMRC सारथी ऐप, मेट्रो स्टेशनों पर लगे सूचना बोर्ड और ट्रेनों में लगातार घोषणाओं (Announcements) का सहारा लिया गया. इसके साथ ही प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों और ग्राउंड मार्शलों की तैनाती की गई थी.
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DMRC ने अदालत को आश्वस्त किया है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित एजेंसियों के आकलन और निर्देशों के अनुसार काम करेगा और मेट्रो नेटवर्क का सुचारू संचालन सुनिश्चित करेगा.
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