बिहार में हो रहे एसआईआर को लेकर राजनीतिक पार्टियों में जहां हकचल तेज हो गई है. वही केंद्रीय चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया है कि देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिहार के तर्ज पर एसआईआर कराने का फैसला लिया है.
मतदाता सूची में संशोधन की नीति का अधिकार
आयोग की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि उसके पास मतदाता सूची में संशोधन की नीति का पूरा अधिकार है. आयोग ने यह हकफनामा याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद दायर किया है.
अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में देश भर में सभी संसदीय, विधानसभा और स्थानीय चुनावों से पहले एक निश्चित समय मे एसआईआर कराने की मांग की है. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल भारतीय नागरिक ही देश की राजनीति और नीति तय करें. चुनाव आयोग ने दायर हलफनामे में उपाध्याय की ओर से दायर याचिका को खारिज करने की मांग की है.
प्रकिया के लिए अदालतें नहीं दे सकती निर्देश- आयोग
आयोग ने कहा है कि इस प्रकिया के लिए अदालतें निर्देश नही दे सकती, क्योंकि यह उसके अधिकार क्षेत्र में आता है. अगर अदालत ऐसा निर्देश देती है कि ये निर्वाचन आयोग के संवैधानिक क्षेत्राधिकार में अतिक्रमण के समान होगा. देशभर में एसआईआर के लिए एक जनवरी 2026 की तारीख को आधार माना गया है, उसी आधार पर तैयारियां भी चल रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने आधार को स्वीकार करने का दिया निर्देश
बता दें कि वर्ष 2026 में असम, केरल, पुड्डुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाला है. इससे पहले आयोग इन एसआईआर राज्यों में एसआईआर कराएगा. इसको लेकर आयोग के 10 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर स्वीकार करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने कहा था कि आधार की प्रमाणिकता और वास्तविकता की जांच करने का अधिकार अधिकारियों को रहेगा. कोर्ट ने कहा था कि इसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नही किया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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