गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट डॉक्टर रवि शंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को यह जानकारी दी है.
छात्रों पर सरकार विरोधी बातें फैलाने का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी. वी. दिनेश ने सीजेआई सूर्यकांत से कहा कि अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस में छात्र पर छात्रों के बीच सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैलाने और प्रस्तावित सीजेपी धरने में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया.
डॉक्टर रवि शंकर मिश्रा पीपीएस 2018 बैंच के अधिकारी है, 31 मई 2021 को भर्ती हुए थे. वो यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले है. अक्षय त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने को लेकर 5 लाख रुपए का नोटिस जारी किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद गौतमबुद्ध नगर के जिलाधकारी ने पांच लाख रुपए का नोटिस जारी किया गया है. यह सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का अवमानना है, जिसमें साफ कहा गया था कि छात्रों के खिलाफ कोई आपराधिक एक्शन नहीं होगा.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि वो हमने अपने आदेश में साफ-साफ कहा था कि छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही होगी. उन्होंने कहा था कि वह इस मामले में गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी से जवाब मांगेंगे.
जिलाधिकारी ने खारिज किया दावा
हालांकि गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने अक्षय त्रिपाठी को लेकर 5 लाख का नोटिस मिलने के दावों को खारिज कर दिया था. जिला प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल यह अनावश्यक भ्रम पैदा किया जा रहा है. प्रशासन ने कहा था कि इस तरह का कोई नोटिस त्रिपाठी को जारी नहीं किया गया है.
यह भी पढ़ें: लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें, IRCTC घोटाला केस में कोर्ट ने तय किए आरोप; 3 अक्टूबर को अगली सुनवाई
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
