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बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट ओर से एक बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अनुराग ठाकुर पर लगाया गया प्रतिबंध आजीवन नहीं माना जा सकता और वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की गतिविधियों में नियमों के तहत भाग लेने के लिए पूरे तरीके से स्वतंत्र हैं. कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रखना अनुपातहीन होगा.

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट ओर से एक बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अनुराग ठाकुर पर लगाया गया प्रतिबंध आजीवन नहीं माना जा सकता और वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की गतिविधियों में नियमों के तहत भाग लेने के लिए पूरे तरीके से स्वतंत्र हैं. कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रखना अनुपातहीन होगा.

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2 जनवरी 2017 के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा कि 2017 का निर्देश आजीवन प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जा सकता और कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के मौजूदा नियमों और प्रावधानों का पालन करना होगा. अनुराग ठाकुर पहले ही माफी मांग चुके हैं, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था. बता दे कि वर्ष 2017 में लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू न करने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटा दिया था और सभी गतिविधियों से दूर रहने का आदेश दिया था.

मौजूदा नियमों और प्रावधानों का पालन करना होगा

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने कहा कि अनुराग ठाकुर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में भाग लेने के लिए स्वतंत्र है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 2017 का निर्देश आजीवन प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जा सकता.

ऐसे में लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहना अनुपातहीन होगा. कोर्ट ने यह भी कहा है कि अनुराग ठाकुर को मौजूदा नियमों और प्रावधानों का पालन करना होगा. अनुराग ठाकुर पहले ही बिना शर्त माफी मांग चुकें है, जिसे इस अदालत ने स्वीकार कर लिया था.

कंट्रोल बोर्ड में भाग लेने के लिए है स्वतंत्र

अदालत ने 2 जनवरी 2017 के आदेश के पैरा 25 (ii) में संशोधन करते हुए कहा कि अनुराग ठाकुर नियमों और विनियमों के अनुसार बीसीसीआई के कार्यों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होंगे. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 2 जनवरी 2017 के फैसले के निर्देश 3 और 4 पहले ही वापस ले लिए गए थे और यह मौजूदा आवेदन केवल उन पर लगाए गए प्रतिबंध से संबंधित था.

9 वर्षों तक गतिविधियों से दूर रहने का था आदेश

अनुराग ठाकुर के वकील ने कहा कि यह प्रतिबंध लगभग 9 साल से लागू था और इसे जारी रखने से गंभीर कठिनाई होगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने से इनकार करने पर अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उस समय तत्कालीन सीजेआई तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन्हें बीसीसीआई की सभी गतिविधियों से दूर करने का आदेश दिया था. यह प्रतिबंध 9 साल से लागू था.

हालांकि, अदालत ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को लिखी अनुराग ठाकुर की एक पत्र पर नाराजगी जताई थी. पत्र में अनुराग ठाकुर ने दरख्वास्त की थी कि वो बीसीसीआई में सीएजी के प्रतिनिधि को रखे जाने का विरोध करें.

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-भारत एक्सप्रेस 

Edited By: Shubhra Rai (Intern)



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