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हाथियों की वापसी और वन्यजीवों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की भूमिका स्वीकार की

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा वन्यजीव केंद्र में हाथियों और अन्य जानवरों की हिरासत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई किया. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई नियमों का पालन कर रहा है तो हाथियों को रखना गलत नहीं है.

गुजरात के जामनगर में वनतारा वन्यजीव केंद्र में कथित अवैध वन्यजीव हस्तांतरण और हाथियों की अवैध हिरासत की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी हाथी को कोई रखना चाहता है और नियमों का पालन कर रहा है कि उसमें गलत क्या है. हालांकि कोर्ट ने अभी तक कोई आदेश पारित नही किया है. जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने एसआईटी की रिपोर्ट को देखने के बाद कहा कि वनतारा पूरी तरह से कानूनों का पालन कर रहा है इसे बदनाम न करें. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अदालत द्वारा गठित एसआईटी की रिपोर्ट से संतुष्ट है.

मीडिया में फैल रही अफवाहों पर लगाई रोक

वही वनतारा के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए नहीं तो न्यूयार्क टाइम्स जैसे अखबार रिपोर्ट का कुछ हिस्सा छापकर नरेटिव गढ़ेंगे. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगा. कोर्ट ने कहा कि हम किसी को और आरोप लगाने की अनुमति नहीं देंगे. कोर्ट ने 25 अगस्त को एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था. गठित एसआईटी में पूर्व जस्टिस जे चेलमेश्वर, उत्तराखंड और तेलंगाना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अनीश गुप्ता शामिल है. समिति को रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने संतुष्टि जाहिर की है. गठित एसआईटी ने एक सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट और एक पेन ड्राइव जमा किया था, जिसमें रिपोर्ट शामिल था.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमें सच्चाई जानने के लिए एक विशेषज्ञ समिति चाहिए. केवल मीडिया रिपोर्ट्स या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर भरोसा नहीं किया जा सकता. याचिका में वंतारा में रखे गए कैद हाथियों की वापसी की निगरानी के लिए समिति बनाने की मांग की गई थी. साथ ही सभी जंगली जानवरों और पक्षियों को जंगल में छोड़ने के आदेश देने की मांग की गई थी. याचिककर्ताओ का कहना था कि हथिनी को जबरन ले जाया गया और वह मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है. जुलाई में मुंबई हाई कोर्ट ने इसको लेकर जैन समुदाय की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था. दायर जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थानांतरित किए जाने का विरोध हो रहा है.

हाथियों की सुरक्षित हिरासत पर कोर्ट ने जताई संतुष्टि

दायर याचिका में यह भी कहा गया था कि त्रिपुरा हाई कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति असंवैधानिक है और वाइल्डलाइफ संरक्षण अधिनियम 1972 सहित अन्य कानूनों का उल्लंघन किया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा था कि मंदिरों से हाथियों को जबरन ले जाया गया और मालिकों की सहमति के बिना वंतारा में रखा गया है. दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों, बब्बरों, शेरों और तेंदुओं जैसे जंगली जानवरों को बड़ी संख्या में भारत लाया गया और वंतारा में रखा गया है. दायर याचिका में 2014 में सुप्रीम कोर्ट में WRRC नामक एनजीओ द्वारा दायर याचिका का हवाला दिया गया था. जिस याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों को मंदिरों में इस्तेमाल करने को लेकर आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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