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गुरुग्राम लैंड स्कैम: रॉबर्ट वाड्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ली याचिका, निचली अदालत से मिली जमानत

गुरुग्राम लैंड स्कैम मामले में रॉबर्ट वाड्रा ने अचानक दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है. आखिर क्या था 42.62 करोड़ रुपये की उस ‘अवैध कमाई’ का राज, जिसने ईडी को कोर्ट में इतना बड़ा दावा करने पर मजबूर कर दिया?

Robert Vadra

गुरुग्राम लैंड स्कैम मामले में दायर याचिका को रॉबर्ट वाड्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ले लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश जोहेब हुसैन ने कहा कि हमने शपथ पत्र पर दिए गए एक गलत बयान पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि याचिका को बिना शर्त के वापस लिया जाना चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि जब तक हम दोबारा याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं देंगे तब तक ये नई याचिका दाखिल नहीं करेंगे. ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए कि उसने याचिका में किए गए दावों पर आपत्ति जताई है. हालांकि कोर्ट ने ईडी की इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

निचली अदालत से 50 हजार के मुचलके पर जमानत

निचली अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और एक श्योरिटी पर जमानत दे दी है. लेकिन कोर्ट ने ईडी की जमकर तारीफ करते हुए वाड्रा को कहा कि जांच के दौरान जांच एजेंसी को गिरफ्तारी के अधिकार का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए. जरूरी होने पर ही गिरफ्तारी होनी चाहिए. कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि चूंकि ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को जांच के दौरान गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं समझी, इसलिए अब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की जरूरत नहीं है. कोर्ट 10 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने 2 अगस्त 2025 को वाड्रा सहित अन्य 10 आरोपियों को प्री-समन जारी किया था.

ईडी की चार्जशीट और 42.62 करोड़ की ‘अवैध कमाई’ का दावा

ईडी ने 17 जुलाई 2025 को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ हरियाणा की शिकोहपुर भूमि से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की थी. पिछली सुनवाई के दौरान ईडी ने बड़ा दावा किया था कि स्काईलाइट ने वाणिज्यिक आवासीय विकास के लिए लाइसेंस ऊपरी दबाव में प्राप्त किया था. ईडी ने कहा था कि लाइसेंस की फाइलें जल्दबाजी में प्रोसेस की गईं और कंपनी की वित्तीय स्थिति की जांच नहीं की गई. नियमों और शर्तों को दरकिनार कर यह लाइसेंस जारी किया गया. ईडी ने उन अधिकारियों के बारे में कोर्ट को जानकारी दी, जो अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं.

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ईडी ने दावा किया है कि वाड्रा की कंपनी ने डीएलएफ (DLF) के साथ सहयोग कर अपराध से प्राप्त धन की तीसरी परत तैयार की. ईडी के मुताबिक चार किश्तों में धन प्राप्त किया गया. ईडी ने कोर्ट को यह भी बताया कि वाड्रा के स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा प्राप्त 42.62 करोड़ की राशि अवैध कमाई है, जिसे दिल्ली में लेयरिंग किया गया. इसलिए यह अदालत के क्षेत्राधिकार का मामला बनता है. चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा सहित 11 आरोपियों के नाम हैं. यह मामला साल 2008 में खरीदी गई जमीन घोटाले से जुड़ा है.



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