Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने ओड़िशा में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन मध्यस्थता का दायरा बढ़ाने पर दिया जोर

ओड़िशा में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि भारत में मध्यस्थता के दायरे को वाणिज्यिक विवादों तक ही सीमित नही रखना चाहिए बल्कि इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है.

Justice BV Nagarathna

Justice BV Nagarathna

Edited by Vaibhav Gupta

ओड़िशा में आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि भारत में मध्यस्थता के दायरे को वाणिज्यिक विवादों तक ही सीमित नही रखना चाहिए बल्कि इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है. इस सम्मेलन का आयोजन ओड़िसा के महाधिवक्ता के कार्यालय और विधि विभाग के तत्वाधान में आयोजित किया गया था.

मध्यस्थता केवल कारोबारी झगडों तक नहीं

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मध्यस्थता केवल कारोबारी झगडों तक सीमित न रहे, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य, बौद्धिक संपदा, कॉरपोरेट गवर्नेस, सार्वजनिक अनुबंध और किशोर न्याय अधिनियम जैसे क्षेत्रों में भी इसे प्राथमिक विवाद निपटान के औजार के रूप में अपनाया जाना चाहिए. जस्टिस नागरत्ना ने जुवेनाइल जस्टिस (केअर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट 2015 के तहत विक्टिम ऑफेंडर मेडिएशन (वीओएम) को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई है.

बच्चों को सजा नहीं, देखभाल की जरुरत

जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का मूल सिद्धांत यह है कि कानून के साथ टकराव में आए बच्चों को सजा नहीं, बल्कि देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास का अवसर दिया जाए. वीओएम एक सुरक्षित मंच बन सकता है जहां पीड़ित अपनी बातों को रख सकें और किशोर अपराधी अपने कर्मों के वास्तविक प्रभाव को समझ सकें, जिम्मेदारी लें और पछतावा व्यक्त करें. यह वह लक्ष्य हासिल करता है जो दंडात्मक न्याय नहीं कर सकता. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इसके बाद ठोस कार्ययोजना बनानी होगी.

मध्यस्थता से मिल सकता हैं समाधान

उन्होंने कहा ये भी कि अमेरिका के तर्ज पर भारत में भी तकनीकी जानकारियों को समझाने वाले विशेषज्ञ मध्यस्थों का पैनल बनाया जाना चाहिए. जस्टिस नागरत्ना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रोगियों और बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच असमान ताकत की ओर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने बौद्धिक संपदा पर कहा कि मध्यस्थता की गोपनीयता और लचीलापन ऐसे समाधान दे सकते हैं, जो मुकदमेबाजी में संभव न हो. उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केंद्र एक वैकल्पिक विकल्प नहीं बल्कि विवादों के समाधान का पहला और सशक्त माध्यम माना जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट ने वकील के खिलाफ शुरू की आपराधिक अवमानना की कार्रवाई

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital