Cash Kaand: कैश कांड के आरोपों से घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जस्टिस वर्मा ने ये इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है. जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से भारी मात्रा में अधजली नोट मिलने के बाद 14 मार्च 2025 को महाभियोग की कार्यवाही शुरू की गई थी. अगस्त 2025 में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 146 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और 3 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था.
कब लाया गया महाभियोग प्रस्ताव ?
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव 21 जुलाई को लाया गया था और उसी दिन राज्यसभा के चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद 11 अगस्त को डिप्टी चेयरमैन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ने जांच कमेटी बनाने की मंजूरी दे दी.
जस्टिस वर्मा का कहना था कि उनके मामले में जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है. लोकसभा के सदस्यों से मिलने के आधार पर अध्यक्ष ओम बिरला ने12 अगस्त 2025 को जांच कमेटी का गठन किया था.
गठित कमेटी में कौन है सदस्य?
जजेज इंक्वायरी एक्ट 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार है. मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी वी आचार्य इसके सदस्य है.
बता दें कि 14 मार्च की रात को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास स्थित स्टोर रूम में लाग लग गई थी, जिस दौरान भारी मात्रा में कैश मिला था. जिसके बाद सीजेआई संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जांच करने को कहा था.
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट के बाद कॉलेजियम ने यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट करने का प्रस्ताव भेजा था. साथ ही सीजेआई ने कैश मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय इन हाउस कमेटी का गठन किया था.
-भारत एक्सप्रेस
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