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कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों की नेमप्लेट अनिवार्यता पर फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, धार्मिक भेदभाव का आरोप

कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर नेमप्लेट लगाने की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई. याचिका में इसे अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन बताते हुए यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली और मध्य प्रदेश सरकारों पर रोक लगाने की मांग की गई है.

Kanwar yatra

Kanwar Yatra 2025: कांवड़ यात्रा वाले मार्ग पर दुकानदारों को नेमप्लेट लगाने से संबंधित विवाद को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. यह याचिका मोहम्मद अहमद की ओर से वकील नरेंद्र मिश्रा ने दायर की है.

याचिका में कहा गया है कि धार्मिक संगठनों की एक समुदाय के लोगों के खिलाफ की जा रही गतिविधियां गैर कानूनी हैं. यह सीधे तौर पर अनुच्छेद 19 (कोई भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का उल्लंघन है.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के आदेश पर रोक लगा दिया था. इस साल यूपी सरकार के बजाए कुछ हिन्दू संगठनों ने कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाली दुकान, ढाबा व रेहड़ी-पटरी मालिकों की पहचान को लेकर.मुहिम चला रखा है. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की गई है. याचिका में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और मध्य प्रदेश सरकार को जारी करने की मांग की गई है.

सरकार की दलील – गलतफहमी रोकने के लिए कदम

बता दें कि पिछले साल भी यह  मुद्दा उठा था. जिसको लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि हमारा आदेश साफ है. अगर कोई अपनी मर्जी से दुकान के बाहर अपना नाम लिखना चाहता है तो हमने उसे रोका नहीं है. हमारा आदेश था कि नाम लिखने के लिए मज़बूर नहीं किया जा सकता.

दिल्ली के वकील ने कहा था कि हमने कांवड़ मार्गो पर नेमप्लेट लगाने को लेकर कोई आदेश पारित नही किया है. कावंड़ यात्रा में सालाना 4.07 करोड़ से अधिक कांवरिया भाग लेते है. उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक, वह किसी भी धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

यूपी सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा था कि पिछली घटनाओं से पता चला है कि बेचे जा रहे भोजन के प्रकार के बारे में गलतफहमी के कारण कई बार तनाव और अशांति पैदा हुई है. इन सबसे बचने के लिए प्लेट लगाने एक बेहतर उपाय है. यूपी सरकार ने कहा था कि वह मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध को छोड़कर, बाकी अन्य दुकानदार पहले की तरह अपना बिजनेस करने को स्वतंत्र है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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