Delhi high court: दिल्ली हाई कोर्ट से लाल किला ब्लास्ट से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपी अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने जावेद अहमद सिद्दीकी को उनकी पत्नी को बीमारी के आधार पर सात दिनों की कस्टडी पैरोल दे दिया है.
ईलाज के लिए अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कस्टडी पैरोल की पूरी अवधि के दौरान सिद्धिकी के घर पर पुलिस सुरक्षा तैनात रहे. सिद्दीकी ने अपनी कैंसर पीड़ित पत्नी के ईलाज के लिए अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल की मांग की थी. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने जावेद सिद्दीकी की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया था. ईडी ने कहा था अगर अंतरिम जमानत दी गई तो वो भाग सकता है. जावेद अहमद सिद्दीकी की पत्नी कैंसर के चौथे स्टेज से जूझ रही है. साकेत कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उनकी हालत स्थिर है, और उनकी ऐसी स्थिति नहीं है कि वो अपनी दिनचर्या से जुड़ी काम खुद नहीं कर सकती.
सिद्धिकी पर करीब 415 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज
कोर्ट ने कहा था कि अगर मां-बाप बीमार पड़े तो बालिग बच्चों से ये उम्मीद की जाती है कि वो उनकी देखभाल करें. दाखिल चार्जशीट में अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्धिकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को आरोपी बनाया गया है. अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था. ईडी का आरोप है कि अल फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों ने बिना वैध मान्यता और मानक पूरे किए छात्रों को दाखिला देकर उनसे फीस वसूली. अपराध से प्राप्त धन का एक हिस्सा फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित इस विश्वविद्यालय की इमारतें, स्कूलों, विभागों से संबंधित इमारतें और हॉस्टल को जब्त कर लिया गया है. सिद्धिकी पर करीब 415 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है.
अल फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों का पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि छात्रों को आकर्षित करने के लिए फर्जी एनएएसी और यूजीसी मान्यता के दावा किया गया है. ईडी ने यूनिवर्सिटी द्वारा वसूले गए 415 करोड़ रुपए की फीस को अपराध से अर्जित धन बताया है. ईडी ने यह भी कहा था कि आरोपी सिद्धिकी पूरे वित्तीय संचालन को नियंत्रित करता था. वही बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने दर्ज सभी एफआईआर को झूठा और मनगढ़ंत बताया था. माना जा रहा है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन और हवाला कारोबार में किया गया. अल फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों का भी पूरा ब्यौरा खंगाला जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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