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1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बलवंत खोखर को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत देने से किया इनकार

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे बलवंत खोखर को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. खोखर ने सजा निलंबित कर जमानत देने की मांग की है, लेकिन कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह में तय की है.

Supreme Court

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बलवंत खोखर को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है. बलवंत खोखर ने सजा को निलंबित करने और जमानत की मांग की है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच नवंबर के अंतिम सप्ताह में दायर याचिका पर सुनवाई करेगी.

मामले की सुनवाई के दौरान बलवंत खोखर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वह साढ़े 13 साल से जेल में बंद है, वो कई बीमारियों से ग्रसित है और वह दिव्यांग है. लिहाजा उसे जमानत दिया जाए. वही सिख समुदाय की ओर से पेश वकील एच एस फुल्का ने विरोध करते हुए कहा कि ये सिर्फ 6 मामलों में सजा हुई है, इसके अलावे कई मामले है. जो अभी चल रहा है. इसलिए खोखर की ओर से दायर याचिका को खारिज किया जाए.

सज्जन कुमार के निधन की जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

वही सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में दोषी सज्जन कुमार की हालही में मौत हो गई है. जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बलवंत खोखर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को अवगत कराया गया था कि आवेदक फरलो के आवेदक पर शीघ्रता से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जेल अधिकारियों ने 26 सितंबर 2024 को ही आवेदन खारिज कर दिया था.

बलवंत खोखर ने 17 दिसंबर 2018 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. खोखर के साथ सज्जन कुमार को इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था और वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और तिहाड़ जेल में बंद है.

दिल्ली कैंट मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था. खोखर ने अपने आवेदन में दावा किया कि वह 66 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक है और शारीरिक रूप से विकलांग है, निचले अंग में 54 प्रतिशत स्थायी विकलांगता है और मधुमेह, सीए के साथ उच्च रक्तचाप और डिसलिपिडीमिया जैसी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है. 10 साल की सजा पाने वाले पूर्व विधायक महेंद्र यादव की मंडोली जेल में कोविड से मौत हो गई थी.

सज्जन कुमार और बलवंत खोखर 17 दिसंबर 2018 को दोषी ठहराए जाने के बाद से तिहाड़ जेल में बंद है. खोखर की उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में बरकरार रखा था, जबकि 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को पलट दिया था.



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