लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की ओर से दायर याचिका को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने खारिज कर दिया है. दायर याचिका में नौकरी के बदले जमीन मामले में उन दस्तवेज़ों तक पहुच मांगी थी, जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा नही किया था.
राऊज एवेन्यु कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने इन याचिकाओं के साथ-साथ अन्य आरोपियों की इसी तरह की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है. कोर्ट ने यह साफ किया है कि आपराधिक मुकदमों की प्रक्रिया के अनुसार, अभियोजन पक्ष को पहले उन दस्तावेजों के आधार पर अपने सबूत पेश करने होंगे. जिन पर उसने भरोसा किया है और जिन दस्तावेजों पर भरोसा नही किया है. उन्हें जिरह के लिए पूर्व शर्तों के रूप में मांगा नहीं जा सकता. कोर्ट ने 35 पेज के.आदेश में कहा कि मुकदमे पर.से अदालत का वैधानिक नियंत्रण आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में हथियाना नही कहा जा सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदकों का कार्यवाही को लंबा खींचने का गुप्त इरादा है.
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और कार्यवाही का सीधा समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों को दर्ज करना आवश्यक है. सीबीआई ने मामले में आईपीसी की धारा 120 बी, धारा 420, 468,467, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 11, 12, 13, 8,9 के तहत चार्जशीट दाखिल किया था.
पैसे लेकर जमीन खरीदना कोई अपराध नहीं- राबड़ी
पिछली सुनवाई में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा था कि उन्होंने जमीन खरीदा था, जिसके बदले पैसे दिए थे. उनके वकील ने यह भी कहा था कि पैसे लेकर जमीन खरीदना कोई अपराध नही है. उन्होंने कहा था कि किसी भी आरोपी को कोई फायदा नही पहुचाया गया. इन लेन देन का आपस में कोई संबंध नही है. राबड़ी देवी के वकील ने कोर्ट से यह भी कहा था कि सीबीआई को लगे आरोपों की जांच करना होगा, और यह साबित करना होगा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है.
आरोप है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप डी कैटेगरी में भर्तियां लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गई. इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफे में दिए या हस्तांतरित किए.
CBI ने इस मामले में कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया
बता दें कि सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री रहने के दौरान सेंट्रल रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले में लालू और उनके परिवार को सस्ते दामों में जमीन ली थी. एजेंसी ने इस मामले में 103 लोगों को आरोपी बनाया है. जिनमे से 5 लोगों की मौत हो चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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