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लीलावती ट्रस्ट विवाद: राजेश मेहता ने की स्टे ऑर्डर और परमबीर सिंह की बहाली की मांग, ACC सल्वी के समक्ष 16 फरवरी को सुनवाई

मुंबई स्थित लीलावती अस्पताल ट्रस्ट विवाद में स्थायी ट्रस्टी राजेश मेहता ने सगे भाइयों पर 100 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाया है. उनकी ओर से चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए गए. इस मामले में अदालत सुनवाई करेगी.

Lilavati Kirtilal Mehta Medical Trust
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Lilavati Trust Dispute: मुंबई में लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के स्थायी ट्रस्टी राजेश किशोर मेहता ने गंभीर आरोप लगाते हुए चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने अपने सगे भाइयों प्रशांत मेहता और राजीव मेहता पर ट्रस्ट के फंड में हेराफेरी, फर्जीवाड़ा और गलत तरीके से पैसे निकालने का आरोप लगाया है. राजेश मेहता का कहना है कि यह सब ट्रस्ट के हितों के खिलाफ हो रहा है और अस्पताल की सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है.

इस मामले में अब सोमवार को असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर सल्वी (ACC-5) के समक्ष सुनवाई होने वाली है. राजेश मेहता ने तत्काल स्टे ऑर्डर की मांग की है, ताकि अन्य ट्रस्टियों द्वारा कोई गैरकानूनी रिजॉल्यूशन पास करके उन्हें या चेतन जोशी को ट्रस्टी पद से हटाया न जा सके.

स्थायी ट्रस्टी को हटाना नहीं संभव

राजेश मेहता का कहना है कि ट्रस्ट डीड में स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है. बॉम्बे हाई कोर्ट के कई फैसलों में साफ कहा गया है कि स्थायी ट्रस्टी या किसी ट्रस्टी को हटाने के लिए कोर्ट में आवेदन देकर ही कार्रवाई हो सकती है. बहुमत के वोट या बोर्ड रिजॉल्यूशन से ऐसा नहीं किया जा सकता. इसलिए उन्होंने असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर से अनुरोध किया है कि प्रशांत मेहता और राजीव मेहता द्वारा उनके खिलाफ कोई अवैध कदम उठाने पर रोक लगाई जाए. इससे वे ट्रस्टी के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियां जारी रख सकें.

परमबीर सिंह की बहाली की मांग

राजेश मेहता ने एक और महत्वपूर्ण मांग की है. उन्होंने पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर अवैध तरीके से हटाए जाने का विरोध किया है. उनका आरोप है कि परमबीर सिंह को गलत तरीके से निकाला गया. इसलिए उनकी बहाली भी की जाए. परमबीर सिंह ने खुद भी अपनी हटाए जाने के खिलाफ चैरिटी कमिश्नर के पास आवेदन दिया था. वे ट्रस्ट के फंड में गड़बड़ी के आरोप लगा चुके हैं.

ट्रस्ट के फंड से 100 करोड़ कहां गए?

पत्र में राजेश मेहता ने पहले बताए गए आरोप दोहराए हैं. उनके अनुसार, प्रशांत मेहता और राजीव मेहता ने ट्रस्ट के फंड से 100 करोड़ से ज्यादा रुपये सिफन किए हैं. फर्जी बोर्ड मिनट्स और रिजॉल्यूशन बनाकर बैंक अकाउंट में साइनेटरी बदल दिए गए. CCTV फुटेज में रिकॉर्ड चुराने का सबूत मिला है. जनवरी 2026 की बोर्ड मीटिंग में उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दी गईं. अस्पताल के हेड्स की शिकायत के बाद मरीजों की संख्या में कमी आई है. राजेश मेहता ने कहा कि यह सब ट्रस्ट के चैरिटेबल उद्देश्यों के खिलाफ है और अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं.

लीलावती चैरिटेबल ट्रस्ट और अस्‍पताल

लीलावती अस्पताल को चलाने वाला यह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट 1978 में स्थापित हुआ था. दिसंबर 2023 में राजेश मेहता, प्रशांत मेहता और राजीव मेहता को स्थायी ट्रस्टी बनाया गया. लेकिन पिछले कुछ महीनों में ट्रस्ट में बड़े बदलाव हुए. जनवरी 2026 में अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों और हेड्स ने शिकायत की कि ट्रस्ट ऑफिस की दखलंदाजी से मरीजों की संख्या 14-16% कम हो गई है. राजेश मेहता ने बताया कि प्रशांत और राजीव मेहता ने कई हेड्स को बिना वजह निकालने की कोशिश की, ताकि फंड की हेराफेरी छिपाई जा सके.


लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LKMMT) एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जिसकी स्थापना 1978 में स्वर्गीय कीर्तिलाल मेहता द्वारा की गई थी. यह ट्रस्ट न केवल लीलावती अस्पताल और अनुसंधान केंद्र का प्रबंधन करता है, बल्कि देशभर में कई अन्य चैरिटेबल इनिशिएटिव्स भी करता रहता है.


फर्जी मिनट्स और रिजॉल्यूशन का आरोप

राजेश मेहता के अनुसार, 12 जनवरी 2026 की बोर्ड मीटिंग में प्रशांत और राजीव मेहता ने जुलाई 2024 की मीटिंग के फर्जी मिनट्स पेश किए. असली मिनट्स में बड़े फैसलों के लिए सभी चार स्थायी ट्रस्टियों की एकमत सहमति जरूरी थी, लेकिन फर्जी वर्जन में “टू ट्रस्टी रूल” दिखाया गया. इससे वे बिना पूछे फैसले ले रहे थे. राजेश मेहता ने विरोध किया तो मीटिंग में उन्हें और उनके परिवार को धमकियां दी गईं, जिसमें गाली-गलौज और जान से मारने की बातें शामिल थीं.

बैंक अकाउंट में बदलाव और फंड सिफनिंग

फरवरी और जून 2025 के फर्जी बोर्ड रिजॉल्यूशन दिखाकर ICICI और यूनियन बैंक के अकाउंट में साइनेटरी बदल दिए गए. राजेश मेहता का दावा है कि इन तारीखों पर कोई मीटिंग नहीं हुई थी. इससे ट्रस्ट के फंड से 100 करोड़ से ज्यादा रुपये निकाले गए. CCTV फुटेज से पता चला कि उनके असिस्टेंट के केबिन से ओरिजिनल रिकॉर्ड चुराए गए.

अदालत में स्टे ऑर्डर मिलने की उम्मीद

सोमवार की सुनवाई में स्टे ऑर्डर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. राजेश मेहता ने कहा है कि उनकी हटाने की कोशिश रोके जाने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. ट्रस्ट की संपत्ति और अस्पताल की सेवाओं की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है. यह मामला अब चैरिटी कमिश्नर और कोर्ट दोनों में चल रहा है. आगे की जांच से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.

अस्पताल पर असर और आगे की कार्रवाई

राजेश मेहता ने कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है. अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने चैरिटी कमिश्नर से तुरंत जांच कर ट्रस्ट की रक्षा करने की मांग की है. यह मामला अब अदालत में सुना जाएगा. राजेश मेहता अच्छे इंसान हैं और ट्रस्ट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

  • भारत एक्सप्रेस

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