राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में उतीर्ण अभ्यार्थी की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया है. क्योंकि रक्त विकार के कारण चिकित्सीय रूप से उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया है. उसने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा उतीर्ण कर ली है, लेकिन रक्त विकार के कारण चिकित्सीय रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके खिलाफ उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि याचिका में जो सवाल उठता है वह यह कि क्या याचिकाकर्ता की स्थिति यानी एचबीई लक्षण पात्रता खंड (उम्मीदवारों के चिकित्सा मानकों के संबंध में) से प्रभावित होगी या नहीं.
एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश
पीठ ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), वायुसेना केंद्रीय चिकित्सा प्रतिष्ठान और अन्य को नोटिस जारी कर 25 जुलाई की अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ता को अयोग्य घोषित करने के कारणों को बताने को कहा है.
उसने यह भी कहा कि अपील बोर्ड के फैसले में याचिकाकर्ता श्लोका सचिन की अपील को खारिज करने को लेकर कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है. इस स्थिति में नई दिल्ली का एम्स एक मेडिकल बोर्ड गठित करे, जो अयोग्यता खंड पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर इस अदालत को एक विशेषज्ञ राय दे. साथ ही बोर्ड अगली सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट पेश करे.
याचिकाकर्ता की 226वीं रैंक, फिर भी अयोग्यता
याचिकाकर्ता ने 2 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र के लिए एनडीए में प्रवेश देने को लेकर केंद्र, यूपीएससी व अन्य को निर्देश देने की मांग की है. साथ ही केंद्रीय चिकित्सा प्रतिष्ठान की 18 मार्च व 22 मई को जारी किए पत्रों को चुनौती दी है. इन पत्रों में सचिन को भारतीय वायुसेना और सेना के तीनों अंगों में भर्ती के लिए अयोग्य घोषित किया गया है.
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुसार उसे भारतीय वायु सेना में भर्ती के लिए चुना गया था. लेकिन जब मेडिकल बोर्ड ने मेडिकल जांच के बाद उसे इस आधार पर अयोग्य पाया गया कि उसे हीमोग्लोबिनोपैथी (एचबीई लक्षण) है. वैसे सचिन ने परीक्षा में 226वीं रैंक हासिल की है, लेकिन उसे चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. उसके बाद उसने 18 मार्च के बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील की जिसे अपील बोर्ड ने 22 मई को उसकी अपील खारिज कर दी थी.
-भारत एक्सप्रेस
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