संसद सुरक्षा चूक मामले में कथित आरोपी नीलम आजाद को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने नीलम आजाद की जमानत की शर्तो संशोधन कर दिया है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने नीलम को दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति दे दी है, लेकिन दिल्ली छोड़ने से पहले पैतृक गांव का पता उन्हें जांच अधिकारी को देना होगा.
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि नीलम पैतृक गांव जाकर हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 10 बजे स्थानीय थाने में जाकर रिपोर्ट करेंगी. नीलम आजाद द्वारा दाखिल अर्जी में कहा गया है कि वह एक गरीब परिवार के सदस्य है और हरियाणा में अपने पैतृक गांव जाकर एलएलबी की पढ़ाई करना चाहती है. लेकिन एलएलबी में प्रवेश के लिए उन्हें परीक्षा देनी होगी, जो दिल्ली के बाहर भी हो सकती है. मामले की सुनवाई के दौरान नीलम के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि कोर्ट की सभी शर्तों का पालन कर रही है. वही दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुका है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2जुलाई 2025 को नीलम को जमानत देते हुए कहा था कि बगैर कोर्ट के अनुमति के दिल्ली नही छोड़ेंगी.
चार्जशीट में छह आरोपियों के नाम शामिल
इस मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया है उनमें मनोरंजन डी, ललित झा, अमोल शिंदे, महेश कुमावत, सागर शर्मा और नीलम आज़ाद का नाम शामिल है. बता दें कि यूएपीए 1967 में बना था, जिसे 2019 में केंद्र सरकार ने संशोधित किया था. दिल्ली पुलिस ने नवंबर 2022 में दिल्ली हाइकोर्ट में जवाब दाखिल कर बताया था कि उसकी तरफ से उस वक्त तक 98 केस यूएपीए के तहत दर्ज किए गए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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