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सुप्रीम कोर्ट से संसद तक ज्ञानेश कुमार की ‘टेंशन’; कानून के जानकारों ने बताया, क्यों जा सकती है CEC की कुर्सी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में नोटिस दिया है.

Bihar Elections 2025

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की क्या आने वाले समय में मुश्किलें बढ़ सकती है? क्योंकि विपक्षी पार्टियों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों को नोटिस सौप दिया है. इसपर लोकसभा के 130 और राज्य सभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए है. जबकि नियमों के मुताबिक लोकसभा में नोटिस के लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है. विपक्ष अभी तक 200 सांसदों की सहमति हासिल कर चुका है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार दुबे के मुताबिक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में प्रावधान है कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय चुनावों की देखरेख, निदेशन और नियंत्रण भारत के चुनाव आयोग के पास रहेगा.

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार भारत के राष्ट्रपति के पास है. वही सुप्रीम कोर्ट के वकील आशीष चौबे के मुताबिक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने के लिए जो प्रक्रिया दी गई है, वही प्रक्रिया चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए लागू होगी. जिस प्रक्रिया को महाभियोग कहा जाता है. जो संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में विशेष बहुमत के साथ प्रस्ताव पारित करने की मांग करती हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए लाए जाने वाले महाभियोग प्रस्ताव को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है. लोकसभा में नोटिस के लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश करना होता है. लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास इस प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होता है. अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कमेटी गठन की व्यवस्था होती है.

विपक्ष ने CEC पर पक्षपात और भेदभाव का आरोप लगाया

इस समिति में आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात कानूनविद शामिल होते है. समिति आरोपों की जांच करती है कि क्या ये आरोप सिद्ध होते है. समिति की रिपोर्ट के आधार पर संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पर मतदान होता है. प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो शर्ते पूरी होनी चाहिए. बहुमत और राष्ट्रपति की मंजूरी. बता दें कि देश के इतिहास में यह पहली बार है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह का नोटिस दिया गया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर विपक्षी पार्टियों ने पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण का आरोप लगाया है.

चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना, बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना सहित कई आरोप लगाए गए है.

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-भारत एक्सप्रेस



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