नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने स्वतः संज्ञान लिया है. समाचार में इसको लेकर छपी खबरों के आधार पर प्रधानपीठ न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वतः संज्ञान लिया है.
एक सप्ताह पहले जवाब दाखिल करने का आदेश
एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण, नोएडा, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ, मुख्य सचिव, पर्यावरण, उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ, जिला मजिस्ट्रेट, गौतम बुद्ध नगर नोएडा से जवाब मांगा है.
कोर्ट ने सुनवाई से एक सप्ताह पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 10 अप्रैल 2026 को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. एनजीटी ने 20 जनवरी 2026 को The Times of india में प्रकाशित समाचार “Noida CEO Removed CM Orders SIT probe into techie’s Deowning के आधार पर यह स्वतः संज्ञान लिया है.
5 लोगों के खिलाफ नामजद FIR
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एक और मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर कराई है. पर्यावरण संरक्षण, जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. बिल्डर अभय कुमार, मनोज कुमार, संजय कुमार, अचल वोहरा और निर्मल के खिलाफ नॉलेज पार्क थाने में मुकदमा दर्ज हुआ. लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विश टाउन के भागीदारों के खिलाफ केस हुआ.
क्या है मामला?
बता दें कि शनिवार रात गुरुग्राम स्थित ऑफिस से घर लौटते समय युवराज की कार दीवार तोड़ते हुए पानी भरे गढ्ढे में गिर गई थी. जिसके चलते डूबने से मौत हो गई. अभी तक के जांच में पता चला कि यह भूमि पिछले दशक में बारिश का पानी और आसपास के आवासीय कक्षेत्रों से निकासी न होने के कारण एक स्थायी तालाब में बदल गई थी.
2015 में सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तावित स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना, जिसमें हेड रेगुलेटर की स्थापना शामिल थी, को लागू करने में देरी ने गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न की.
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-भारत एक्सप्रेस
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