कैश कांड मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के आधारों की जांच के लिए गठित तीन-सदस्यीय समिति का पुर्नगठन किया है. लोकसभा अध्यक्ष ने पिछली वर्ष 12 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद इस समिति का गठन किया था, जिससे उन्हें पद से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
तीन-सदस्यीय समिति का पुर्नगठन
लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि “अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को हटाने के लिए जिन आधारों पर अर्जी दायर की गई है. उनकी पड़ताल करने के उद्देश्य से एक समिति पुनर्गठित की है, जो छह मार्च 2026 से प्रभावी होगी.
इसमें निम्नलिखित तीन सदस्य शामिल होंगे-सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील श्री बी. वी आचार्य.” जस्टिस कुमार और आचार्य पिछली समिति में भी सदस्य थे, जबकि जस्टिस चंद्रशेखर नए सदस्य हैं.
उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव का स्थान लिया है. जस्टिस वर्मा का कहना है कि उनके मामले में जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
जांच कमेटी में कौन-कौन?
लोकसभा के सदस्यों से मिले प्रस्ताव के आधार पर अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को जांच कमेटी का गठन किया था. जजेस इंक्वायरी एक्ट, 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित इस कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार हैं. मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी वी आचार्य इसके सदस्य हैं.
गौरतलब है कि लोकसभा स्पीकर ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. समिति में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और विधिवेत्ता बी वी आचार्य शामिल हैं. अब वर्मा ने इसके खिलाफ ही केस दाखिल किया है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


