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सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन सट्टेबाजी पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब, युवाओं और समाज पर गंभीर प्रभाव की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन सट्टेबाजी पर दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता ने बताया कि भारत में लगभग 65 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े हैं, जिससे समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है.

Supreme Court

ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब देने को कहा है. जस्टिस जे बी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब देने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह गंभीर मामला है. देश में लगभग तीन करोड़ युवा प्रभावित है. दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे ऑनलाइन बेटिंग और जुए के खेलों को पूरी तरह प्रतिबंधित करें और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है. यह जनहित याचिका सीएएससी और अधिवक्ता शौर्या तिवारी की ओर से दायर की गई है.

अवैध ऑनलाइन बेटिंग पर रोक की मांग

दायर जनहित याचिका में आईटी एक्ट की धारा 69 A के तहत सभी अवैध बेटिंग और जुआ खेलने पर तुरंत रोक लगाई जाए. याचिका में कहा गया है कि बैंकिंग और यूपीआई ट्रांजेक्शन को रोकने के निर्देश दिए जाएं ताकि इन एप्स पर पैसों का लेनदेन न हो. गूगल और एप्पल प्ले स्टोर को उन्हीं गेमिंग की अनुमति दी जाए जिन्हें केंद्र सरकार से लाइसेंस मिला हो. दायर याचिका में कहा गया है कि 18 साल।से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के ई स्पोर्ट्स या मनी गेम्स में भाग लेने से रोका जाए और सीबीआई, ईडी और इंटरपोल की मदद से विदेशी कंपनियों से करीब 2 लाख करोड़ रुपये टैक्स वसूली की जाए.

समाज और अर्थव्यवस्था पर असर

याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक भारत में करीब 65 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग में शामिल हैं, जिससे सालाना 1.8 लाख करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा हैं. लगभग आधी आबादी इन खेलों की लत में फंस चुकी है, जिससे समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य पुलिस छोटे लोगों को पकड़ रही हैं, जबकि केंद्र सरकार ऑनलाइन जुए के बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं.

याचिका में यह भी कहा गया है कि बड़े फिल्मी सितारे और क्रिकेटर इन अवैध ऐप्स का प्रचार कर रहें हैं, जिससे युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है और मानसिक तनाव, लत और आत्महत्याएं बढ़ रही हैं. याचिककर्ताओ के मुताबिक यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या देश के।सामाजिक ढांचे को कमजोर कर देगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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