Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

पतंजलि आयुर्वेद ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की याचिका

पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने डाबर च्यवनप्राश विज्ञापनों पर लगी रोक को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की है. अदालत ने पहले यह रोक इसलिए लगाई थी क्योंकि पतंजलि के विज्ञापन से उपभोक्ताओं में भ्रम फैल रहा था.

पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने अपील दायर कर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी है. सिंगल बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद को डाबर च्यवनप्राश प्रोडक्ट का अपमान करने वाले किसी भी टेलीविजन विज्ञापन को प्रसारित करने पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि पतंजलि की विज्ञापन रणनीति से उपभोक्ताओं में भ्रम फैला रहा है और इससे डाबर की साख को नुकसान पहुंच सकता है. डाबर ने पतंजलि पर अपने उत्पाद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था. कोर्ट ने डाबर की ओर से दायर उस अर्जी को स्वीकार कर लिया था, जिसमें उसने अपने च्यवनप्राश विज्ञापनों में अपमानजनक टिप्पणियों के कारण उन्हें हटाने का अनुरोध किया था. डाबर ने पतंजलि पर अपने उत्पाद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुचाने का आरोप लगाया था.

डाबर ने लगाया उत्पाद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का आरोप

डाबर और पतंजलि के बीच इसको लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है. इससे पहले डाबर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि पतंजलि के च्यवनप्राश में मर्करी की मात्रा है. जिसको लेकर पतंजलि ने डिस्क्लेमर नही दिया है, जबकि कानूनी रूप से डिस्क्लेमर देना चाहिए. डाबर ने कहा था कि बच्चों के लिए हानिकारक है. डाबर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पतंजलि आयुर्वेद उसके च्यवनप्राश उत्पादों के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन चला रहा है. डाबर ने पतंजलि को अपमानजनक विज्ञापन चलाने से रोकने का आदेश देने का आग्रह किया था.

डाबर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा था कि पतंजलि आयुर्वेद एक आदतन अपराधी है. अखिल सिब्बल ने यह भी कहा था कि सभी च्यवनप्राश को प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथो में उल्लिखित विशिष्ट फ़ॉर्मूलेशन और अयवयो का पालन करना चाहिए, जिससे साधारण च्यवनप्राश की धारणा भ्रामक और डाबर जैसी प्रतिस्पर्धियों के लिए हानिकारक हो जाती है, जिसकी इस सेगमेंट में 61.6 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है.

दरअसल डाबर को पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक स्वामी रामदेव के एक विज्ञापन से दिक्कत है. इस विज्ञापन में रामदेव कहते हैं- जिनको आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नही, चरक, सुश्रुत, धन्वंतरी और च्यवनऋषि की परंपरा में मूल च्यवनप्राश कैसे बना बना पाएंगे. इससे ये ध्वनि निकलती है कि सिर्फ पतंजलि स्पेशल च्वनप्राश ही मूल है और बाजार में अन्य च्यवनप्राश के निर्माताओं को परंपरा के बारे में कोई जानकारी नही है, और नतीजतन वे सभी नकली या साधारण है.

बता दें कि 2017 में दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को च्यवनप्राश के विज्ञापन को प्रकाशित या प्रसारित करने पर रोक लगा दिया था.

ये भी पढ़े: मानहानि मामले में फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital