इंटरनेट की कीमतों के नियमन की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को वैकल्पिक वैधानिक उपाय तलाशने की छूट दे दी है. यह याचिका रजत नामक एक व्यक्ति ने दायर की थी. सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि उपभोक्ताओं के पास इंटरनेट सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कई विकल्प है.
कोर्ट ने कहा यह एक मुफ्त बाजार हैं, आपको LAN मिलता है, आपको वायर्ड इंटरनेट मिलता हैं, अन्य इंटरनेट भी है, बीएसएनएल और एमटीएनएल भी आपको इंटरनेट दे रहे हैं. सीजेआई ने कहा कि अगर आपको किसी की सेवा पसंद नहीं है तो आपके पास बहुत विकल्प है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि बाजार के अधिकांश हिस्से पर जियो और रिलायंस बकम नियंत्रण है. इसपर कोर्ट ने कहा कि अगर आप आप कार्टेलाइजेशन का आरोप लगा रहे है, तो कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया के पास जाने को कहा.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जियो और एयरटेल का कुल मार्किट शेयर लगभग 80 फीसदी है. ऐसे में उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए. टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑफ इंडिया के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में कुल इंटरनेट ग्राहकों की 50.40 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ रिलायंस जियो इंफोकॉम के पास थी. इसके बाद भारती एयर टेल 30.47 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर था.
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-भारत एक्सप्रेस
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