पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा हत्या हुए 50 साल हो गए है. लेकिन उसके बावजूद मुकदमा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. इसको लेकर भाजपा नेता और सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. अश्विनी कुमार चौबे ने कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की पीठ 11 नवंबर को इस मामले में सुनवाई करेगी.
सही से नहीं हुई मामले की जांच: अश्विनी का आरोप
दायर याचिका में दावा किया गया है कि एलएन मिश्रा की हत्या के लिए जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे असल अपराधी नहीं है. अश्विनी कुमार चौबे ने आरोप लगाया है कि सीबीआई ने इस मामले की गहराई से जांच नहीं की और यह हत्या उस दौर की एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी. इसका उद्देश्य जनता के बीच लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता ललित नारायण मिश्रा को रास्ते से हटाना था.
आंदोलन में शामिल होने वाले थे जेपी
उन्होंने यह भी कहा है कि सीबीआई ने उस समय निष्पक्ष और गहन जांच नहीं कि थी, जिसके चलते असली षड़यंत्रकर्ता का पता नहीं चल पाया. इसलिए उन्हें लगता है कि मामले को फिर से खोलकर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए. चौबे ने अपनी याचिका में कहा कि मिश्र जेपी आंदोलन में शामिल होने वाले थे और उन्होंने जयप्रकाश नारायण से मुलाकात भी की थी. उनका दावा है कि अगर वे आंदोलन में शामिल हो जाते, तो सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक खतरा बन सकते थे.
शुरू से जांच कि की थी मांग
अश्विनी कुमार चौबे ने इससे पहले 27 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नए सिरे से जांच की मांग कर चुके है. 2 जनवरी 1975 को बिहार के समस्तीपुर में एक रेलवे प्रोजेक्ट का उद्घाटन के दौरान ग्रेनेड हमले में ललित नारायण मिश्र की मौत हो थी. सीबीआई की जांच में आनंद मार्ग संगठन के चार सदस्यों संतोषजनक, सुधेवानंद, गोपाल जी और रंजन द्विवेदी को आरोपी बनाया गया था. लंबी सुनवाई के बाद दिल्ली की एक अदालत ने 2014 में सभी को दोषी ठहराया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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