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IPS अजय पाल शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

West Bengal Elections: बंगाल चुनाव में ऑब्जर्वर नियुक्त हुए IPS अजय पाल शर्मा की भूमिका सवालों के घेरे में है. उन पर पद के दुरुपयोग और पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा और चढ़ गया है.

Supreme Court Final Deadline in Sheena Bora Murder Case
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Petition: 2011 बैच के आईपीएस अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनाव में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनकी नियुक्ति को लेकर टीएमसी और बीजेपी में ठन गई है. विपक्ष उन्हें सत्ता पक्ष का ‘एजेंट’ बता रहा है, जबकि बीजेपी और आयोग उनकी तैनाती को सुरक्षा के लिहाज से जरूरी मान रहे हैं.

इससे पहले कोलकाता हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर ऐसी ही एक याचिका को खारिज कर दिया था.

पद की भूमिका के खिलाफ काम

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई की मांग नहीं की गई है. अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है. शर्मा के खिलाफ यह याचिका आदित्य दास ने दायर की है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि शर्मा बहुत पक्षपाती हैं और वह अपने पद की भूमिका के खिलाफ काम कर रहे हैं.

धमकी, दबाव और पक्षपातपूर्ण व्यवहार

दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि शर्मा जब से पश्चिम बंगाल चुनाव में ऑब्जर्वर बने हैं, तब से वह धमकी, दबाव और पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे है. उनपर राजनीतिक उम्मीदवारों को धमकाने का भी आरोप है. अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में शामिल रहे हैं.

इससे पहले इनके खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि शर्मा को पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था, लेकिन वे पर्यवेक्षक के रूप में कार्य नहीं कर रहे है और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे है.

याचिकाकर्ता की सभी दलीलों को खारिज कर दिया

हाई कोर्ट के सामने यह भी आरोप लगाया गया था कि आईपीएस अजय पाल शर्मा आम जनता को डरा रहें है. उसमें यह भी कहा गया था कि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि अदालत अजय पाल शर्मा को नियमों के अनुसार काम करने का निर्देश दे. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता की सभी दलीलों को खारिज कर दिया था.

टीएमसी और बीजेपी के बीच विवाद बढ़ा

अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश में अपनी विभिन्न तैनातियों के दौरान कई बड़े सुरक्षा अभियानों में भूमिका निभाने के कारण एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में पहचाने जाते है. शर्मा की तैनाती को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच विवाद और बढ़ गया है.

बीजेपी और चुनाव आयोग का कहना है कि शर्मा को राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया है. जबकि टीएमसी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि बीजेपी वोटरों को डराने के लिए एजेंट तैनात कर रही है. अजय पाल शर्मा मूल रूप से पंजाब के रहने वाले है.

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-भारत एक्सप्रेस



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