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टेरर फंडिंग मामला: आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने NIA को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा है. कोर्ट ने निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब कर 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई तय की है.

Delhi High Court, Child Trafficking
Edited by Akansha

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 6 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस शैलिन्दर कौर की पीठ पर निचली अदालत से रिकॉर्ड को तलब किया है.

राशिद इंजीनियर ने दायर की याचिका

राशिद इंजीनियर ने निचली अदालत द्वारा आरोप किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है. कोर्ट ने इस मामले को राशिद इंजीनियर की अंतरिम जमानत पर सुनवाई कर रही बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद इंजीनियर को 24 जुलाई से चार अगस्त के लिए कस्टडी पैरोल दे दिया था.

राशिद इंजीनियर ने उमर अब्दुल्ला को हराया था

राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

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बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था. पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

ISI के सहयोग से इन संगठनों ने हिंसा को दिया अंजाम

एनआईए के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

-भारत एक्सप्रेस 



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