रोहिणी कोर्ट ने गोवा नाइट क्लब अग्निकांड मामले के आरोपी सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा बंधुओं को झटका लगा है. कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना ने यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि लूथरा ब्रदर्स की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका में किए गए दावे पूरी तरह गलत है.
उन्होंने कहा कि जिस ट्रेड लाइसेंस पर निर्भर हैं, वह पंचायत द्वारा जारी किया गया था, और वह भी 2023 में ही एक्सपायर हो गया है और अभी तक रिन्यू नहीं कराया गया है. उन्होंने कहा कि लूथरा ब्रदर्स ने खुद स्वीकार किया है कि यह स्थान मालिकों (लूथरा ब्रदर्स ) द्वारा ही संचालित किया जाता है. गोवा सरकार ने कहा कि आरोपियों ने जांच में सहयोग नही किया है. 6 दिसंबर को थाईलैंड जाने की खबर गलत है. आग की घटना के बाद 7 दिसंबर को सुबह सवा 1 बजे मैक माई ट्रिप से लाखों की टिकट बुक कर सुबह इंडिगो फ्लाइट से थाईलैंड चले गए. जबकि थाईलैंड में कोई बिजनेस का काम नही है.
लूथरा ब्रदर्स की मुश्किलें बढ़ीं
गोवा सरकार के वकील ने यह भी बताया कि अगले दिन पुलिस उनके घर गई तो उनकी मां ने बताया कि दोनों कहां है नही पता. इसलिए लूथरा ब्रदर्स के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया. जबकि 9 दिसंबर को ब्लू कार्नर नोटिस जारी किया गया. गोवा पुलिस ने कहा कि लोग क्लब में लगी आग से मर रहे थे और ये थाईलैंड भाग गए.
पुलिस ने आरोपियों की मेडिकल हिस्ट्री को बोगस बताया है. गोवा पुलिस ने यह भी कहा कि कानून केवल कानून को मानने वालों की मदद करता है. जब एक बार कोर्ट से नोटिस जारी हो गया तो जांच के लिए सामने आना चाहिए था. ना कि रुकावट पैदा करनी चाहिए थी.
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकील तनवीर मीर ने कहा कि घटना दुखद है. लेकिन घटना घटने के बाद हर तरफ से मेरे मुवक्किल और उसके परिवार को मारने और जला देने की धमकियां दी जा रही थी. मीर ने कहा लूथरा ब्रदर्स के दो क्लब पर बुलडोजर चला दिया. मैं भी इंसान हूं. प्रोपर्टी सील कर दी गई. ऐसी स्थिति में इंसान का दिमाग कैसे काम करेगा? अपनी जान की सुरक्षा के लिए कहा जाएगा. उन्होंने कहा कि मैं भाग नहीं रहा हूं, यहां आकर जांच का सामना करना चाहता हूं, लेकिन आप थाईलैंड में मेरी लिंचिंग करना चाहते है.
उन्होंने राज्य सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि हमें राहत सिर्फ वापस आने के लिए चाहिए. आगे गोवा की कोर्ट में जा सकते है.
-भारत एक्सप्रेस
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