Saket Court Order: साकेत कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि देर रात किसी अन्य व्यक्ति से फोन पर बात करने के आधार पर पत्नी के चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है.
चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता
घरेलू हिंसा मामले में कोर्ट ने कहा कि महिला महज देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करने के आधार पर उसके चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. व्यक्ति ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें घरेलू हिंसा के एक लंबित मामले में उसकी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को सुरक्षित रखने की उसकी मांग को खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा कि भारतीय समाज अब ऐसा पिछड़ा समाज नहीं रहा है, जहां किसी पुरुष से बात करने वाली महिला को गलत माना जाता हो.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र, मल्टीनेशनल कंपनियों आदि में काम कर रही हैं और उनके पुरुष सहकर्मी भी होते हैं. मामले की सुनवाई के दौरान पति ने कोर्ट को बताया कि पत्नी देर रात होने वाली बातचीत उनके बीच विवाद का मुख्य कारण थी और यह जानकारी उसके बचाव के लिए जरूरी है. लेकिन कोर्ट ने पति की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि महिला की देर रात की बातचीत को उसके चरित्र से जोड़ना न केवल गलत है बल्कि उसकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है.
कोर्ट के अनुसार,
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में लगाये गए आरोप के संबंध में कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं पेश किए गए. अदालत ने कहा कि महिला की कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग करके उसकी निजता में दखल को सही ठहराया जा सकता है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब तक किसी महिला पर अवैध, विवाहेत्तर या गैरकानूनी संबंध का ठोस आरोप न हो, तब तक केवल देर रात फोन पर बातचीत को आधार बनाकर उसके चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. अदालत के अनुसार ऐसा करना उसकी निजता में अनुचित दखल होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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