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साकेत गोखले ने मानहानि मामले में हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती, लक्ष्मी पुरी को 50 लाख हर्जाने और माफी के आदेश पर रोक की मांग

टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें पूर्व राजनयिक लक्ष्मी पुरी को 50 लाख रुपये का हर्जाना देने और माफी मांगने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने उनके वेतन की कुर्की का आदेश भी दिया है.

TMC Spokesperson Arrested

TMC प्रवक्ता साकेत गोखले

टीएमसी के सांसद और राज्य सभा सांसद साकेत गोखले ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी है. सिंगल बेंच ने गोखले के पूर्व राजनयिक लक्ष्मी पूरी को कथित मानहानि के लिए 50 लाख रुपये का हर्जाना अदा करने और माफीनामा प्रकाशित करने का निर्देश दिया था. जस्टिस नवीन चावल और जस्टिस रेनू भटनागर की पीठ 8 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी.

गोखले ने कोर्ट को बताया है कि वह सिंगल-जज के निर्देशानुसार माफी प्रकाशित करेंगे. एक जुलाई के आदेश का अनुपालन नहीं करने पर लक्ष्मी पूरी ने साकेत गोखले के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की है. जोकि एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है. मामले की सुनवाई के दौरान साकेत गोखले की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित सिब्बल ने कहा कि ट्विटर पर की गई टिप्पणियां न्यायसंगत और लोकतांत्रिक आलोचना के तहत आती है.

साकेत गोखले की ओर से न्यायसंगत आलोचना का दावा

उन्होंने कहा कि मैंने ट्वीट्स में प्रतिवादी का नाम तक नहीं लिया और न ही किसी भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. बिना साक्ष्य के आदेश दिया गया. इससे पहले हाई कोर्ट ने साकेत गोखले की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था. गोखले ने कोर्ट से आग्रह किया था कि उनके खिलाफ ₹50 लाख हर्जाना भरने और माफ़ी मांगने के आदेश को वापस लिया जाए. इससे पहले लक्ष्मी पुरी ने गोखले के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था जिसमें उन्होंने आर्थिक तंगी का हवाला देकर हर्जाना न देने की पेशकश की थी.

बता दें कि हालही में जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने साकेत गोखले को झटका देते हुए, उनकी सैलरी को कुर्क करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि डिक्रिटल राशि जमा न करने के लिए कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. वेतन के संबंध में धारा 60 (आई) सीपीसी के मुताबिक कुर्की के वारंट जारी किए जाए, जो कि 1.9 लाख रुपए प्रति माह बताया गया है.

कोर्ट के निर्देश और वेतन कुर्की की प्रक्रिया

कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक 50 लाख रुपए की धनराशि कोर्ट में जमा नहीं हो जाती, तब तक वेतन कुर्क रहेगा. लक्ष्मी पूरी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि डिक्री द्वारा निर्णय ऋणी को माफी प्रकाशित करने और 27 अगस्त 2024 तक 50 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है.

लक्ष्मी पूरी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा था कि हम ऑर्डर 21 रूल 41 (3) के तहत अर्जी दाखिल करेंगे, जिसमें कहा गया है कि अगर कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है, तो 3 महीने की जेल की सजा है. कोई डिटेल नहीं आई है. उन्हें कार्रवाई के कारण से लेकर डिक्री तक बैंक और संपत्ति का ब्यौरा दाखिल करना था. कोर्ट ने गोखले के वेतन की कुर्की के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 का अवलोकन किया.

कोर्ट ने कहा था कि हम सीआईसी के अनुसार दो तिहाई तक वेतन कुर्क कर सकते है. कोर्ट ने पिछले साल 1 जुलाई को गोखले से चार सप्ताह के भीतर सोशल मीडिया पर मांगने और पूरी को 50 लाख रुपए का हर्जाना देने को कहा था. उस आदेश के क्रियान्वयन नहीं होने पर पूरी ने याचिका दाखिल कर आदेश को क्रियान्वयन की मांग की थी.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया नगर में ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक, अगली सुनवाई अगस्त में

-भारत एक्सप्रेस 



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