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संजय भंडारी की संपत्ति जब्ती पर 5 मई को आएगा फैसला: राऊज एवेन्यु कोर्ट ने फिर सुरक्षित रखा निर्णय

आर्म्स डीलर संजय भंडारी की संपत्ति जब्त करने की ईडी की याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट 5 मई को फैसला सुनाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी भंडारी का भगोड़ा टैग बरकरार रखा है.

Rouse Avenue Court

Rouse Avenue Court

हथियारों के सौदागर (आर्म्स डीलर) संजय भंडारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भंडारी की संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट अब 5 मई को अपना फैसला सुनाएगी.

इससे पहले कोर्ट 18 अप्रैल को फैसला सुनाने वाला था, लेकिन ईडी द्वारा कुछ तकनीकी कमियों को स्पष्ट करने के बाद अदालत ने एक बार फिर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

दिल्ली हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका

हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने संजय भंडारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ (FEO) घोषित करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि याचिका में कोई मेरिट नहीं है, इसलिए भंडारी के ऊपर से ‘भगोड़ा’ का टैग हटाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.

कोर्ट में ईडी और बचाव पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली

संजय भंडारी के वकील की दलील: वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि भंडारी ब्रिटेन में कानूनी रूप से रह रहे हैं और वहां की कोर्ट ने उनके प्रत्यर्पण की अर्जी खारिज कर दी है. उन्होंने ईडी द्वारा दाखिल नए दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए.

ईडी की दलील: ईडी ने कहा कि जब्त की जाने वाली संपत्तियों की सूची पर किसी तीसरे पक्ष ने आपत्ति नहीं जताई है. एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) से बनाई गई हैं और इन्हें जब्त करना अनिवार्य है.

संजय भंडारी पर क्या हैं आरोप?

संजय भंडारी साल 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग गया था. उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के गंभीर मामले दर्ज हैं:

काला धन: विदेशों में अवैध रूप से धन भेजने और टैक्स चोरी का आरोप.

रक्षा सौदे: रक्षा सौदों में रिश्वत लेने और बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप.

मुकदमा: आयकर विभाग ने 2015 में केस दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की.

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भंडारी को 2020 में ब्रिटेन की पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन फिलहाल वह लंदन हाईकोर्ट से प्रत्यर्पण के खिलाफ राहत मिलने के बाद वहीं रह रहा है. भारत सरकार लगातार उसे वापस लाने और उसकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने के प्रयास कर रही है.



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