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‘हर मामला हमारे पास न लाएं’: वकीलों पर हुए हमले की CBI जांच वाली अर्जी सुप्रीम कोर्ट से खारिज

Prashant Bhushan BCI Case: SC ने वकीलों पर कथित हमले की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की छूट दे दिया है.

Supreme Court
Edited by Shubhra Rai

Prashant Bhushan BCI Case: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों पर कथित हमले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की छूट दे दिया है.

कोर्ट ने वकीलों पर हुए हमले की सीबीआई जांच की मांग की

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट ने वकीलों पर हुए हमले की सीबीआई जांच की मांग की. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि उसने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई से कभी भी इनकार नहीं किया है. दायर याचिका में वकीलों पर हुए हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी. 21 अगस्त 2026 को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यालय के बाहर युवा वकीलों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था.

याचिकाकर्ता का आरोप है कि,

प्रदर्शन के दौरान वकीलों से मारपीट की गई. भूषण ने यह भी आरोप लगाया कि बीसीआई चेयरमैन ने प्रदर्शनकरियों को कथित तौर पर लीगल कॉकरोच कहा था. भूषण ने दावा किया कि बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा ने गर्व से बयान जारी करते हुए कहा कि कुछ कानूनी कीड़े-मकोड़ें यहां विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और हमारे वकीलों ने आधी रात को आकर उनकी पिटाई कर दी. हम सीबीआई जांच और सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने की मांग कर रहे है. उन्होंने कहा कि हमें डर है कि बीसीआई फुटेज को नष्ट कर सकती है.

आर्थिक एवं पेशेवर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा

हैदराबाद लॉ यूनिवर्सिटी विवाद को लेकर प्रदर्शन किया गया था. यह विरोध प्रदर्शन बीसीआई के उस आदेश के खिलाफ था, जिसमें नालसार यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट हो रहे बैच के एनरोलमेंट को रोकने के लिए कहा गया था. हालांकि अब यह आदेश वापस ले लिया गया है. प्रदर्शन में शामिल वकीलों ने बेरोजगारी और काम की कमी का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में युवा वकीलों के पास पर्याप्त काम नहीं है और उन्हें आर्थिक एवं पेशेवर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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