सुप्रीम कोर्ट वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशनिंग कर जल्द सुनवाई की मांग की गई जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. असुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है.
कानून को छह महीने का समय
इससे पहले कोर्ट ने सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया था. इससे पहले सीजेआई बी आर गवई ने कहा था कि मामले को सूचीबद्ध करने का मतलब मंजूरी देना नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने कहा था कि कानून को छह महीने का समय दिया गया था, जिसमें से पांच महीने फैसला आने में बीत गया है, अब सिर्फ एक महीना बचा है. मुस्लिम संगठनों ने इस नए वक्फ संशोधन कानून 2025 का विरोध किया है.
इस कानून की विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और सिख व ईसाई समुदाय समेत अन्य अल्पसंख्यकों द्वारा भी आलोचना की गई है. इसको लेकर मौलाना रहमानी ने कहा कि इस कानून को न केवल मुस्लिम संगठनों, बल्कि विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों, सिख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने भी अस्वीकार किया हैं इसके बावजूद सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की योजना को बोर्ड ने गैरकानूनी करार दिया है. उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ और सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन मामले की अवमानना बताया है.
‘उम्मीद पोर्टल’ सरकार द्वारा एक डिजिटल पहल
बता दें कि वक्फ संशोधन एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख रखा है. सुप्रीम कोर्ट तय करने वाला है कि सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून 2025 पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं है.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि इस कानून में मौजूद विवादित प्रावधानों को तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जबतक इसपर कोई फैसला नहीं आ जाता. दरअसल सरकार द्वारा लाया लॉन्च किया जा रहा वक्फ उम्मीद पोर्टल केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहल है. जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत पंजीकरण और प्रबंधन करना है. सरकार के दावा है कि यह पोर्टल वक्फ.संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और अवैध कब्जे को रोकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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