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नीट यूजी पेपर लीक में हुए प्रदर्शन में अभद्र भाषा और मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘छात्रों से निपटने में बरतें संयम, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी पेपर लीक के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को सुधार का अवसर देने की मांग वाली याचिका को मूल याचिका के साथ संलग्न कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से बुजुर्गों की सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी.

सुप्रीम कोर्ट

नीट यूजी पेपर लीक के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को सुधारने का अवसर देने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मूल याचिका के साथ संलग्न कर दिया है. दायर याचिका में कहा गया है कि इन बच्चों पर मुकदमा दायर करने के बजाए 7 दिन की सेल सेवा ढूंढी जाए.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद याचिका को मूल याचिका के साथ इसे संलग्न कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा है कि अधिकारियों को युवा छात्र प्रदर्शनकरियों से निपटने में संयम बरतना चाहिए और सावधानी से काम लेना चाहिए. क्योंकि हिंसा को रोकने के लिए हिंसक प्रतिक्रिया करने से स्थिति और बिगड़ती है. सीजेपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सीजेआई ने यह टिप्पणी की है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि लोकतंत्र में, इस तरह के शांतिपूर्ण मार्च के दौरान सुरक्षा बलों को भी संयम बरतना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बहुत सावधानी से काम लेना चाहिए, ताकि युवा हिंसा का रास्ता न अपनाए. सीजेआई ने कहा कि हिंसक प्रतिक्रिया से स्थिति और बिगड़ेगी. सबसे बड़ी ताकत उनकी बात सुनना है. यह सुनना है कि वे क्या कह रहे हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं. कोर्ट ने लागू करने वाली एजेंसियों के फैसले पर भी भरोसा जताया है.

प्रदर्शन के बाद आयोजकों की भूमिका पर भी उठा सवाल

कोर्ट ने कहा कि इसे कानून लागू करने वाली एजेंसी की समझदारी पर छोड़ देते है, उन्हें हमसे बेहतर पता है कि स्थिति से कैसे निपटना है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रिजवान अहमद ने कहा कि यह मंत्री और पुलिस की जवाबदेही का मामला था, हम इसे मानते है. 15 दिन बीत चुके हैं. आयोजकों की जवाबदेही का क्या? वे एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे है और आग बुझाने से इनकार कर रहे है.

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक किशोर-किशोरियों के भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है. जिन लोगों ने हिंसा या शत्रुता नहीं कि है, उन पर मुकदमा चलाना सही नहीं होगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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