सुप्रीम कोर्ट से टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शब्बीर शाह को जमानत दे दिया है. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विस्तृत आदेश पारित करेगा.
भड़काउं वीडियो सहित कई सबूत
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एनआईए से पूछा था 1990 के दशक के कुछ चुनिंदा भाषणों का जिक्र क्यों किया जा रहा है? इसपर एनआईए ने कोर्ट को बताया था कि शाह के खिलाफ भड़काउं वीडियो और आपत्तिजनक ई-मेल सहित कई सबूत मौजूद हैं. जिन भाषणों का एनआईए जिक्र कर रही है वह 30 या 35 साल पुराना है. जिसपर कोर्ट ने सवाल उठाया था और कहा था कि आप 2019 में इन सबूतों को बरामद कर रहे हैं और कह रहे हैं और ये भड़काउं भाषण है.
34 गवाहों से हुई पूछताछ
एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि शाह के घर की हुई तलाशी के दौरान यह भड़काऊ वीडियो बरामद किया गया है. लूथरा ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में 34 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कोर्ट को बताया था कि शब्बीर अहमद शाह का नाम सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आया था.
टेरर फंडिंग से जुड़े होने का आरोप
मामले में कोर्ट ने पूछा था कि आपके खिलाफ मुख्य आरोप क्या है और उसका सबूत क्या है? इसपर गोंजाल्विस ने कहा था कि कथित भाषणों और टेरर फंडिंग से जुड़े होने का आरोप है. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि शाह का आखिरी कथित भड़काऊ भाषण 1993 में यानी 22 साल पहले दिया गया था.
उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया था कि एक व्यक्ति शाह के पास पैसा ला रहा था, लेकिन वह पकड़ा गया और पैसा शाह तक पहुचा ही नहीं. उस व्यक्ति को परिवर्तन निदेशालय के मामले में बरी कर दिया गया था और शाह को भी उस मामले में जमानत मिल चुकी है.
मौजूदा मामले में वह 6.5 साल से जेल
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रमनाथ ने पूछा था कि शाह कितने समय से हिरासत में है. इसपर गोंजाल्विस ने कहा था कि अलग-अलग मामलों में 40 साल जेल में बिताए है. मौजूदा मामले में वह 6.5 साल से जेल में बंद है. वही जस्टिस विक्रमनाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि समस्या यह है कि हर बार जब आप बाहर आते हैं, तो फिर से भाषण देने लगते है.
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-भारत एक्सप्रे
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