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मास्टर ऑफ रोस्टर विवाद की फिर हुई चर्चा, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पूर्व CJI दीपक मिश्रा को ‘बचाने’ के बदले कानून मंत्रालय से 1 करोड़ रुपये मांगे थे.

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लखनऊ के वकील अशोक पांडे की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कानून मंत्रालय से एक करोड़ रुपए की मांग की थी. अशोक पांडे का दावा है कि उन्होंने पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा को अपमान, बेइज्जती और पद से हटाये जाने से बचाया था. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है.

आरोप के बाद ‘माननीय’ क्यों?

याचिका को खारिज करते हुए सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि उस समय सीजेआई दीपक मिश्रा पर इतने घिनौने आरोप लगाने के बाद आप उनके नाम के आगे ‘माननीय’ क्यों लगा रहे हैं? सीजेआई ने कहा कि आपने हमारे लिए एक समाजसेवा की है, हम आपको धन्यवाद देते हैं.

इसपर याचिकाकर्ता ने कहा कि मेरे खिलाफ हर्जाने की वसूली के लिए मुझे मेरे घर से उस समय उठा लिया गया जब मैं पूजा कर रहा था. सीजेआई ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके दावे को सही ठहराया. हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है. हाई कोर्ट ने अशोक पांडे की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

चार वरिष्ठ जजों ने उठाया सवाल

बता दें कि तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा ने अपने आप को मास्टर ऑफ रोस्टर घोषित कर दिया था, और संविधान पीठ का गठन कर सुनवाई शुरू कर दी थी. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे.

असंतुष्ट जजों में जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे. चार जजों ने एक समिति गठित करने का सुझाव दिया था, जो केसों को आवंटित करने के मामले में सीजेआई को सुझाव दे सके. तत्कालीन सीजेआई ने इसे दरकिनार करते हुए नई व्यवस्था की घोषणा की थी.

वहीं, जस्टिस चेलामेश्वर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि उन्होंने सीजेआई को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नही चल रहा है और सुधार के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. असंतुष्ट जजों के मुताबिक, सीजेआई ने उनकी बात नहीं सुनी थी, इसलिए मीडिया के सामने आना पड़ा था.

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-भारत एक्सप्रेस



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