Shabir Shah Bail Case: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की ओर से दायर जमानत याचिका का एनआईए ने विरोध किया है.
एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बात को लेकर आपत्ति जताई कि भारत और जम्मू कश्मीर ईकाई को अलग-अलग बताया जा रहा है. जबकि सिर्फ इंडिया कहा जाना चाहिए. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ शब्बीर शाह की ओर से दायर जमनात याचिका पर सुनवाई कर रही हैं.
कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 नवंबर तय की
एसजी मेहता ने कहा कि भारत और जम्मू कश्मीर ईकाई को अलग-अलग बताए जाने का मैं मुद्दा बना रहा हूं. वही शब्बीर शाह की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि वह बहुत बीमार है. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वो बीमार हैं, यही तो समस्या है.
एसजी मेहता ने कोर्ट को यह भी बताया कि एनआईए ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. जिसके बाद कोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए शब्बीर शाह के वकील को समय दे दिया है. कोर्ट 14 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सुनवाई के दौरान एसजी मेहता ने शब्बीर शाह के इस दावे का विरोध किया कि वे 30 साल से जेल में बंद है. यह तथ्यात्मक रूप से गलत है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि शब्बीर शाह सिर्फ 51 दिन से जेल में बंद है. इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने जवाब देते हुए कहा कि एक व्यक्ति जो 39 साल से जेल में बंद है, उसे आप कहते है कि वो 51 दिन से जेल में बंद है. हम सुनवाई में साबित करेंगे कि वो कितने साल जेल में रहे हैं.
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24 मामलों में से 18 में आरोप तय
दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद शब्बीर अहमद शाह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं. शब्बीर शाह के खिलाफ कुल 24 मामले दर्ज है. शब्बीर शाह को एनआईए ने 2019 में गिरफ्तार किया था. दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शब्बीर शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा था कि वह पिछले छह साल से तिहाड़ जेल में बंद है. उनके खिलाफ अभी तक कोई अपराध साबित नही हुआ है.
शब्बीर शाह के खिलाफ दर्ज 24 मामलों में से 18 मामलों में उन पर आरोप लगाया गया है. जबकि तीन मामले लंबित है और तीन को खारिज कर दिया गया है. गोंजाल्विस ने यह भी कहा कि एनआईए की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक कुल 400 गवाह है, जिनमें से मात्र 15 गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है. इसको देखते हुए शाह को जमानत मिलनी चाहिए. क्योंकि इस मामले में ट्रायल लंबा चलने की उम्मीद है. जबकि एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि ये एक गंभीर अपराध हैं, जिसमें पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए टेरर फंडिंग को अंजाम दिया गया.
इस अपराध में शब्बीर शाह ने खास भूमिका निभाई है. शब्बीर शाह जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के भी संपर्क में था. शब्बीर शाह दो मामलों में तिहाड़ जेल में बंद है. उसपर टेरर फंडिंग का आरोप है. साथ ही ईडी ने उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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