पीएम मोदी (PM Modi) की शिवलिंग (Shivling) पर बैठे बिच्छू (scorpion) से तुलना (comparison) करने के मानहानि केस (defamation case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कांग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) को राहत दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से करने के मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को कोर्ट ने अगली सुनवाई तक बरकरार रखा है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान थरूर की ओर से पेश पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की सुनवाई के लिए छोटी तारीख दी जाए और नॉन मिसलेनियस डे सूचीबद्ध करने की मांग की.
प्रशासक, राजनेता और जज सभी एक ही समूह के है- एम. एम सुंदरेश
इसपर जस्टिस एम. एम सुंदरेश ने कहा कि इसपर इतना संवेदनशील क्यों होना? यह सब बंद करें. उन्होंने कहा कि प्रशासक, राजनेता और जज सभी एक ही समूह के है और इनकी त्वचा काफी मोटी होती है. बता दें कि हाई कोर्ट याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया प्रधानमंत्री के खिलाफ शिवलिंग पर बिच्छू जैसे आरोप घृणित एवं निंदनीय है.
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि कार्यवाही निरस्त करने का कोई कारण नजर नही आ रहा है. कोर्ट ने शशि थरूर की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत उन्हें तलब करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है. यह केस पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर बिच्छू बोलने पर शशि थरूर के खिलाफ दायर किया गया था. यह याचिका बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने दायर किया था.
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शशि थरूर ने की थी PM की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से
28 अक्टूबर 2018 को बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल में शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिवलिंग पर बैठा बिच्छू कहा था. राजीव बब्बर ने अपनी याचिका में कहा है कि शिव का भक्त हूं और शशि थरूर के बयान ने असंख्य शिवभक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. याचिका में शशि थरूर के बयान को असहनीय बताया गया है. याचिका में आ शशि थरूर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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