सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के रायबरेली लोकसभा सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टल गई है. मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल जस्टिस बीवी नागरत्ना अवकाश पर है. जिस कारण मामले में सुनवाई नही हो सकी. इलाहाबाद हाईकोर्ट से चुनाव याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई है. यह याचिका रायबरेली के मतदाता रमेश सिंह की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने दायर की है.
याचिका में लगाए गए दो मुख्य आरोप
दायर याचिका में दो आरोप लगाए गए हैं. पहला आरोप है कि सोनिया गांधी ने अभी तक इटली की नागरिकता नही छोड़ी है, जबकि दूसरा आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली की जामा मस्जिद के शादी इमाम अहमद बुखारी ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की अपील की थी. याचिका में कहा गया है कि इटली की नागरिकता छोड़ने की घोषणा न करने के कारण सोनिया गांधी चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं थी, इसके अलावा अहमद बुखारी ने सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद कांग्रेस के हक में वोट देने की अपील की थी, इसलिए इसे धर्म के नाम पर वोट मांगना और चुनाव में भ्रष्ट तरीके अपनाना माना जाएगा.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए गए सवाल
दायर याचिका में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का शुरुआत में ही याचिका खारिज किया जाना सही नही है. हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने के 1 साल 80 दिन बाद अपना फैसला सुनाया था. ऐसे में लगता है कि इतने लंबे समय में हाई कोर्ट याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कई मुद्दे भूल गया था. याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है. साथ ही चुनाव याचिका का.मेरिट के आधार पर ट्रायल करने के आदेश देने की मांग की गई है.
नागरिकता कानून और इटली की नागरिकता का मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि 2014 में रायबरेली से चुनाव लड़ते समय सोनिया गांधी अपने मूल देश इटली की नागरिक थी. उन्होंने हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिसमें उनके इटली की नागरिकता छोड़ना साबित होता हो. मूल नागरिकता छोड़े बगैर कोई भारतीय नागरिक नही हो सकता है. याचिका में नागरिकता कानून की धारा 5(1(सी) की वैधानिकता का भी मुद्दा उठाया गया है, जिसमें विदेशी स्त्री को भारतीय नागरिक से शादी करने पर भारत की नागरिकता मिलती है. याचिका में कहा गया है कि यह कानून भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करता है और राष्ट्रहित में नही है.
सोनिया गांधी का तर्क और हाईकोर्ट का रुख
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ दायर यह याचिका गलत, भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण है, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें भारत की नागरिकता दी गई है और वो इटली की नागरिकता छोड़ चुकी है. इसपर हाई कोर्ट ने कहा था कि ऐसे हालात में.इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्व नही है. लिहाजा याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाता है.
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