Delhi High Court Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें 144 करोड़ रुपये जमा करने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने एयरलाइन पर 50 हजार का जुर्माना लगाया और संपत्ति कुर्क करने की दलील को अस्वीकार कर दिया. आर्थिक तंगी का हवाला देने के बावजूद स्पाइसजेट को अब कानूनी देनदारी चुकानी होगी.
दायर पुनर्विचार याचिका खारिज
स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने अजय सिंह की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने 30 अप्रैल को जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने स्पाइसजेट पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
144 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश
दायर याचिका में कलानिधि मारन तथा केएल एयरवेज के साथ जारी कानूनी विवाद में 144 करोड़ रुपए जमा करने के पूर्व आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी. स्पाइसजेट ने 144 करोड़ रुपए जमा करने के बजाए सिंह की संपत्ति को कुर्क करने की पेशकश की थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 जनवरी को स्पाइसजेट और अजय सिंह को 194 करोड़ रुपए की स्वीकृत देनदारी के एवज में छह सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में 144 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया था.
18 मार्च को चार सप्ताह के लिए बढ़ा
इस राशि के जमा करने की समयसीमा 18 मार्च को चार सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान एयरलाइन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया था कि स्पाइसजेट कामकाज और कैश फ्लो पर गंभीर असर पड़ा है, खासकर खाड़ी देशों की उड़ानों पर लगी पाबंदियों की वजह से. रोहतगी ने कोर्ट से फंड जुटाने के लिए समय मांगते हुए कहा कि पूरा कारोबार ठप पड़ा है. मैं तीन बड़ी एयरलाइनों में सबसे छोटी हूं.
730 करोड़ का भुगतान किया
अगर जमा न करने के कारण मेरे खाते जब्त कर लिए गए, तो पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी. यह मामला एक शेयर ट्रांसफर समझौता से जुड़ा है, जिसमें स्पाइसजेट, उसके प्रमोटर अजय सिंह, केएएल एयरवेज और कलानिधि मरण शामिल हैं. स्पाइसजेट ने अब तक 730 करोड़ का भुगतान कर दिया है. इसमें 580 करोड़ रुपए पूरा मूलधन और 150 करोड़ रुपए ब्याज शामिल है.
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-भारत एक्सप्रेस
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