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‘अदालत गुप्त फोन कॉल से नहीं चलती…’ तीस हजारी कोर्ट ने महाठग सुकेश की लगाई क्लास, सुनाया बड़ा फैसला

Sukesh Chandrashekhar News: निचली अदालत के जज को फोन कर जमानत देने का दबाव बनाने के मामले में सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने आईपीसी की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी करार दिया है. कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था पर सीधा हमला माना है.

Tis Hazari Court
Edited by Shubhra Rai

Sukesh Chandrashekhar News: निचली अदालत के जज को फोन कर दबाव बनाने के मामले में सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने दोषी करार दिया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा की अदालत ने सभी पक्षो की जिरह के बाद सुकेश चंद्रशेखर को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 170, 189 और धारा 507 के तहत दोषी करार दिया है. सुकेश चंद्रशेखर की सजा पर 27 अगस्त को बहस होगी.

सुकेश ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

हालांकि निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सुकेश ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह सिर्फ धोखाधड़ी या खुद को कोई और व्यक्ति बताने का मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और उसकी पवित्रता को प्रभावित करने की कोशिश का मामला है. सुकेश ने पहले सुप्रीम कोर्ट के जज के सचिव और बाद में खुद सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर पहचान बताया और कथित तौर पर विशेष जज पूनम चौधरी पर जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की. आरोप है कि उसका मकसद न्यायिक प्रक्रिया और मामले के परिणाम को प्रभावित करना था.

सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ कुल 31 मामले दर्ज

कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए इसे न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बताया है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन के जरिए सुकेश ने भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई कर रहे एसीबी के विशेष जज के आधिकारिक लैंडलाइन नंबर पर संपर्क किया. कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को दोषी करार देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को निजी फोन कॉल के जरिए किसी जज को किसी खास तरीके से फैसला देने का आदेश देने का अधिकार नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेश अदालत द्वारा पारित किया जाता है, गुप्त फोन कॉल के जरिए नहीं. कोर्ट ने यह भी कहा कि सुकेश चंद्रशेखर ने फर्जी कॉलर आईडी, आवाज में बदलाव और प्रभावशाली पहचान के जरिए यह मान लिया था कि वह न्यायिक प्रक्रिया को अपने हिसाब से मोड़ सकता है. कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी या राजनीतिक बिचौलिए का रूप धारण करना एक तरह का लेन-देन आधारित अपराध हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज या इनके सचिव का रूप धारण करना संस्थागत व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है. सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ कुल 31 मामले दर्ज है.

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-भारत एक्सप्रेस



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